अमेरिका: हिंदुओं द्वारा गीता पाठ करने पर सेनेट ने जताई आपत्ति


वाशिंगटन। एक ओर तो अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत को र्धािमक सहिष्णुता का पाठ पढ़ा रहे हैं वहीं दूसरी ओर उनके ही एक राज्य आइडहो में िंहदुओं के पवित्र ग्रंथ गीता के पाठ पर आपत्ति उठाई जाने लगी है। ऐसा करने वाला कोई और नहीं बाqल्क एक सीनेटर है। आइडहो के एक रिपाqब्लकन सेनेट ने कहा है कि अगर स्टेट सेनेट में िंहदू पूजा हुई, तो वह इसका बहिष्कार कर देंगे। हालांकि इस मामले में उनका साथ एक भी सेनेट मेंबर ने नहीं दिया है।आर-डॉल्टन गार्डन्स से सेनेट स्टीव विक ने कहा है कि फस्र्ट अमेंडमेंट गैर-ईसाइयों को पूजा की इजाजत देता है, लेकिन उनका मानना है कि िंहदू को पूजा की इजाजत नहीं मिलनी चाहिए। इसके पीछे वह तर्वâ देते हैं कि िंहदुओं में जाति व्यवस्था है और वह गाय की पूजा करते हैं। विक यह भी कहते हैं, ‘जिन धर्मों का प्रतिनिधित्व हमारे कानून बनाने वाली सभा में नहीं है, मैं नहीं मानता कि उनसे हमारे राज्य या देश को कोई मजबूती मिलेगी।’ उनका कहना है कि अमेरिका का आधार न सिर्पâ जुडेव-क्रिस्चन धर्म था बाqल्क इसका वर्वâ एथिक भी था और िंहदू पूजा से उसका अनादर होगा। दरअसल, नेवादा के जाने-माने िंहदू पुजारी राजन जेड ने सेनेट के सदस्यों से एक पुजारी के रूप में सदन में जाकर भगवदगीता का पाठ करने की इजाजत मांगी थी।
सेनेट विक ने पेâसबुक पर इसका विरोध जारी रखा और कहा, ‘इससे यह मेसेज जाएगा कि हम अमेरिका (रीति-रिवाज) से संतुष्ट नहीं हैं, इसलिए िंहदू पूजा की इजाजत दी जा रही है।’ इस विरोध के बारे में सेनेट के प्रेजिडेंट प्रो-टेम ब्रेंट हिल ने कहा, ‘मैंने इस पाठ की समीक्षा की और मुझे इसमें कुछ भी गलत नहीं लगा। इसमें तो परमेश्वर की बात की कही गई है।’ उधर जेड ने कहा कि वह गीता का पाठ करके सेनेट सदस्यों से कहेंगे वे सभी हमेशा दूसरों की भलाई के लिए काम करें।