अमेरिका में बाल अपराधियों की फौज


आयोवा। विश्व के सर्वाधिक शक्तिशाली देश अमेरिका के आयोवा प्रांत में ऐसा कानून बनाया जा रहा है जिसमें बच्चों को भी हैंडगन (पिस्तौल और रिवॉल्वर) रखने व चलाने की अनुमति होगी। एहतियात के तौर पर यह बात जोड़ी गई है कि बच्चे अभिभावकों की निगरानी में ऐसा कर पाएंगे। आयोवा के सदन हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में यह प्रस्ताव पारित भी हो चुका और अब इसे सीनेट में अंतिम मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अमेरिका में पिछले वर्ष ४३ ऐसी घटनाएं हुर्इं जिनमें बच्चों ने घर में रखे हथियार से खेल-खेल में या तो खुद को गोली मार ली अथवा अपने हम उम्र साथी, माता, पिता या संबंधी को गोली मार दी। नए कानून का कड़ा विरोध हो रहा है। कहा जा रहा है कि कानून पास हो गया तो वहां बाल अपराधियों की फौज खड़ी हो जाएगी। खिलाफत तो वर्तमान में मौजूद उस प्रावधान की भी शुरू हो चुकी जिसके तहत बच्चों को लॉंग गन और शॉटगन अपने साथ रखने की अनुमति (अभिभावक की निगरानी में) दी जा रही है।
पिस्तौल और रिवॉल्वर की आयोवा के साथ अमेरिका में सबसे अधिक बिक्री होती है। नए प्रस्ताव से अराजकता जैसी ाqस्थति पैदा हो सकती है। प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने वाली डेमोव्रेâट कस्र्टन माक्वार्ट ने मुहिम चलाई है। वह लगातार कटाक्ष कर रही हैं कि एक साल, दो साल के बच्चे को हैंडगन चलाने की अनुमति देकर सरकार क्या साबित करना चाहती है? क्या इन्हें गन लोड करना भी सिखाया जाएगा? हमें अपराधी बच्चों की फौज नहीं चाहिए। अमेरिकी नागरिक जेम्स ई. लोनेकर का किस्सा पिछले दिनों खूब चर्चा में रहा। विगत रविवार को उसका छह साल का बच्चा घर में रखी पिस्तौल से खेल रहा था। उसे नहीं पता था कि उसमें गोली भरी है। उस समय वह माता पिता के साथ बेडरूम में था। लोनेकर बाहर जाने के लिए तैयार हुआ था, इसी दौरान उसने पिस्तौल मेज पर रख दी और वंâप्यूटर पर काम करने लगा, इसी बीच उसके बेटे ने पिस्तौल का ट्रिगर दबा दिया, गोली लोनेकर को लगी और उसकी मौत हो गई। देश में यह १८वीं घटना थी जिसमें दस साल से कम उम्र के बच्चे के गोली दागने से किसी की मौत हुई। कई बच्चे स्वयं भी मारे गए। बच्चों द्वारा स्वूâलों में भी हत्या की कई घटनाएं सामने आ चुकीं। नए कानून के तर्कों का व्यापक विरोध हो रहा है।