अफगानिस्तान में कौमार्य परीक्षण को मजबूर महिलाएं


काबुल। अफगानिस्तान में महिलाओं-युवतियों के कौमार्य परीक्षण का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। दोषी पाए जाने पर उन महिलाओं को जेल की सजा भी काटनी पडती है। मानवाधिकार संस्था ह्यूमैन राइट्स वॉच ने अफगान सरकार के इस कदम की कड़ी आलोचना करते हुए इस परीक्षण को तत्काल बंद करने की मांग की है। मानवाधिकार संस्था ने सरकारी डॉक्टरों द्वारा किए जाने वाले कौमार्य परीक्षण को अमानवीय करार दिया है। साथ ही कहा कि यह यौन हिंसा के समान है। मानवाधिकार आयोग की ताजा रिपोर्ट में ५३ महिलाओं का कौमार्य परीक्षण कराने की बात सामने आई है। इनमें १३ वर्ष की किशोरियां भी शामिल हैं। इन पर शादी से पूर्व यौन संबंध स्थापित करने का आरोप है। इनमें से आधी महिलाओं का तो कई लोगों के सामने एक से ज्यादा बार परीक्षण किया गया। अफगानिस्तान में शादी पूर्व यौन संबंध अवैध है। दोषी पाए जाने पर १५ साल वैâद का प्रावधान है। मानवाधिकार शोधकर्ता हेथर बर्र ने इसे महिलाओं की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है। उन्होंने सरकार से संबंधित कानून में बदलाव करने की मांग की है। दुनिया भर में कौमार्य परीक्षण को नकार दिया गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष २०१४ में इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक मानने से इन्कार कर दिया था। तालिबान शासन के पतन के बाद से अफगानिस्तान में महिलाओं की ाqस्थति में सुधार हुआ है, लेकिन अब भी उनकी हालत दयनीय बनी हुई है।