अनाज संकट से जूझ रहे 34 से अधिक देश


संयुक्त राष्ट्र। आतंकी, जातीय िंहसा तथा अलनिनो के चलते ३४ देशों में भीषण अनाज संकट पैदा हो गया हैं, इनमें से ८० प्रतिशत देश अप्रâीकी महाद्वीप के हैं। कुछ देशों में तो भुखमरी जैसी ाqस्थति भी पैदा हो चुकी है। संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के अनुसार सीरिया, इराक, यमन, सोमालिया और सेंट्रल अप्रâीकन रिपाqब्लक में आतंकी िंहसा के कारण फसल उत्पादन में बुरी तरह गिरावट आई। िंहसा का पड़ोसी देशों पर भी व्यापक असर हो रहा है। शरणार्थी समस्या के कारण कानून- व्यवस्था संकट भी साफ दिखाई दे रहा है। सीरिया से लाखों लोग तुर्की होते हुए ग्रीस में शरण ले चुके और लाखों अभी उसके दरवाजे पर खड़े हैं। इराक और यमन के संकट ने मध्य पूर्व के कई देशों में िंचता िंहसा बढ़ा दी। अप्रâीकी देश कांगो में पड़ोसी देश सेंट्रल अप्रâीकन रिपाqब्लक के एक लाख से अधिक शरणार्थी पहुंच चुके। दक्षिणी अप्रâीकी राष्ट्रों के साथ मध्य अमेरिका और वैâरेबियाई देशों में २०१६ के फसल अनुमानों पर अलनिनो का ग्रहण लगता दिखाई दे रहा है। रिपोर्ट के अनुसार अलनिनो से उत्पन्न सूखे के कारण १५ लाख लोगों को पलायन करना पड़ा। मोरक्को और अल्जीरिया में फसल उत्पादन घट गया। कुछ देशों में बाढ़ का कहर है, वहां दस लाख लोगों के प्रभावित होने की संभावना है। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन(एफएओ) ने बताया कि उत्तर कोरिया में पिछले वर्ष आई बाढ़ और सूखे के कारण इस वर्ष अनाज उत्पादन में तेज गिरावट आई।
भीषण खाद्यान्न संकट झेलने वाले देशों में जिम्बाब्वे, र्बिकना फासो, चाड, जिबूती, इरीट्रिया, गिनी, लाइबेरिया, मलावी, रिपाqब्लक ऑफ कांगो, माली, मॉरीटेनिया, नाइजर, सियरा लियोन, बुरुंडी, इथोपिया, केन्या, लेसोथो, मेडागास्कर, मोजााqम्बक, दक्षिण सूडान, सूडान, स्वाजीलैंड, उगांडा शामिल हैं। भारत की सीमा से लगे तीन राष्ट्र अफगानिस्तान, नेपाल और म्यांमार को भी अन्य देशों से खाद्यान्न मदद की दरकार है। अफगानिस्तान आतंकी िंहसा की मार झेल रहा है, वहां कृषि की ाqस्थति कभी बेहतर रही ही नहीं। नेपाल में तीन मुख्य कारणों से खाद्यान्न संकट पैदा हो गया। मधेशी आंदोलन से कृषि, उद्योग और व्यापार की ाqस्थति गड़बड़ा चुकी। देश में सूखा पड़ा और बाढ़ साथ-साथ चलते हैं। म्यांमार भी बाढ़ के चलते फसल उत्पादन से जुड़ी समस्याओं का सामना कर रहा है।