गुजरात में शादी की अनोखी परंपरा, दुल्हा बन-ठन कर घर में रहता और सातफेरे दुल्हन-ननंद घूमते!


(PC : ndtv.com)

भारत जैसे विशाल देश में हर १०० किमी पर वेशभूषा, भाषा और बोली बदलती है। विविधता से भरपूर हमारे देश में विभिन्न समाजों और क्षेत्रों में रिवाज भी अलग-अलग होते हैं। शादी-ब्याह की बात करें तो भी हर इलाके में अलग-अलग ढंग से ब्याह रचाये जाते हैं। आज आपको गुजरात के ठेठ अंदरूनी गांवों में शादी के ऐसे रिवाज के विषय में बतायेंगे जिसे देखकर शायद आप आश्चर्य चकित रह जायेंगे।

गुजरात के छोटा उदेपुर के सुरखेडा, सनाडा और अंबाल गांव के रहने वालों के यहां ऐसा रिवाज है कि शादी की बारात का समय होता है तो दुल्हा बन-ठन कर तैयार हो जाता है, बाराती भी बाजे-गाजे के साथ दुल्हन के यहां जाने के लिये रैडी हो जाते हैं लेकिन एन वक्त पर घोड़ी पर दुल्हा नहीं बैठता, बल्कि दुल्हे की बहन सवार होती है। दुल्हा बन ठन कर घर में ही रहता है और बारात के शादी से दुल्हन के साथ लौटने का इंतजार करता है। ये तीनों गांवों के लोग कुंवारा देव में आस्था रखते हैं और उसी के अनुरूप दशकों से इस परंपरा का अनुसरण कर रहे हैं।

बारात विवाह स्थल पर पहुंचती है और दुल्हन रीति-रिवाज के साथ दुल्हे की बहन यानि होने वाली ननंद के साथ सात फेरे लेती है, ननंद की अपनी भाभी को मंगलसूत्र पहनाती है।

समाज के अग्रणियों का मानना है कि इस परंपरा का पालन करने से लग्न-जीवन सुखमय बितता है। यदि इसका पालन न किया जाए तो अपशुकन होता है और सांसारिक जीवन लंबा नहीं चलता। जब बारात विवाह के बाद घर पहुंचती है तब यदि परिवार चाहे तो दुल्हन और दुल्हे के सात फेरे की रस्म दोबारा करवा सकता है।

है न, आश्चर्यजनक परंपरा। हमारा देश जाना ही इन लोक परंपराओं के जतन के कारण है।