इस बार की सर्दी को भी प्रभावित करेगा अल नीनो!


सामान्य से अधिक होगा तापमान, बड़ेगी मुसीबत – खरीफ की फसल पर हो सकता है प्रतिकुल असर

नई दिल्ली (ईएमएस)। बारिश की विदाई अभी हुई है और अब शीत ऋतु में अल नीनों की आशंका से नई आफत बढ़ने वाली है। लगता है मानसून की मनमानी से परेशान किसानों और आम लोगों को आने वाले समय में भी राहत मिलने की उम्मीद नहीं दिखती।

पुणे स्थित भारतीय मौसम विभाग के पुर्वानुमान के मुताबिक इस साल सर्दियों में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने और रबी की फसल के शुष्क हालात पैदा होने की आशंका है। वैज्ञानिकों ने इसकी वजह गर्म समुद्री धारा ‘अल नीनो’ को जिम्मेदार ठहराया है।

पुणे स्थित मौसम विभाग में जलवायु निगरानी और विश्लेषण समूह के अध्यक्ष एके श्रीवास्तव ने कहा, अल नीनो की वजह से प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि हुई है और यह धीरे-धीरे अरब सागर की ओर बढ़ रहा है, जिसका असर भारतीय उपमहाद्वीप पर पड़ेगा। इससे शीत ऋतु में भी सामान्य से अधिक तापमान रहने की उम्मीद है। हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि औसतन तापमान में कितनी वृद्धि होगी और इसका कितना असर पड़ सकता है।

श्रीवास्तव ने कहा, हम अगले महीने अलग से अल नीनो के प्रभाव पर पुर्वानुमान जारी करेंगे। लेकिन शीत ऋतु में पिछले साल के मुकाबले सामान्य तापमान कुछ अधिक होने की उम्मीद है। मौसम की संभावित परिपाटी और पश्चिमोत्तर मानसून की चाल ने भारतीय नीति निर्माताओं की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि इनसे प्रभावित 60 इलाकों में सिंचाई की स्थायी व्यवस्था नहीं है। वैज्ञानिकों ने कहा, गर्मी में बोई जाने वाली खरीफ की फसल से देश की 50 फीसदी खाद्यान्न की जरूरत पूरी होती है, जो पूरी तरह से मानसून की बारिश पर निर्भर है।

श्रीवास्तव ने कहा, प्रशांत महासागर में गर्म धारा अल नीनो का बनना प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसका असर पूरे विश्व के मौसम पर पड़ता है। अल नीनो की धारा ताकतवर होने पर कई स्थानों पर सामान्य तापमान में वृद्धि हो जाती है और कई हिस्सों में सूखे के हालात पैदा हो जाते हैं। इसी की वजह से सितंबर और अक्टूबर में तापमान बढ़ता है।

श्रीवास्तव ने कहा कि अल नीनो के बनने की प्रक्रिया गत कई महीनों से प्रशांत महासागर में हो रही है। इसकी वजह से ही जून से सितंबर के महीने में देश के कई इलाकों में सामान्य से कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के ही पूर्वानुमान समूह में वैज्ञानिक डीएस पई ने कहा, भारत में अल नीनो का असर सर्दियों में देखने को मिलेगा। अभी भी यह धारा स्थिर नहीं हुई है। इसलिए इसका असर नवंबर और दिसंबर में सामने आएगा। गत वर्षों में मौसम विभाग के पुर्वानुमान गलत साबित हुए हैं। उदाहरण के लिए मौसम विभाग ने इस साल सामान्य से 97 फीसदी बारिश होने का अनुमान लगाया था। जबकि इस साल सामान्य से 9.4 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं कई इलाकों में 30 फीसदी से भी कम बारिश हुई है।

निजी मौसम पूर्वानुमान एजेंसी स्काईमेट के प्रमुख मौसम वैज्ञानिक महेश पलावत ने कहा, दक्षिण-पश्चिम मानसून को लेकर लगाया गया हमारा पूर्वानुमान सटीक रहा। हमने सामान्य से कम बारिश होने का अनुमान लगाया था। हालांकि इसमें अल नीनो के तापमान पर पड़ने वाले असर पर गौर नहीं किया गया था और पूर्वानुमान बारिश के वितरण तक सीमित था। उन्होंने कहा, हमारा अनुमान है कि लौटते मानसून के कारण नवंबर-दिसंबर में भी तमिलनाडु और केरल में सामान्य से अधिक बारिश होगी और कई इलाकों में दोबारा बाढ़ जैसे हालात पैदा हो सकते हैं।