साईंबाबा मंदिर के सिक्के लेने से बैंकों का इनकार


आपके पास एक्स्ट्रा कैश पड़ा होगा, तो आप उसे बैंक में जमा करायेंगे। बैंक भी आपके कैश को आपके खाते में सहर्ष जमा कर लेंगे और कैश काऊंटर पर कोई भला कर्मचारी बैठा होगा तो वह आपको थैंक्यू भी बोलेगा।

लेकिन शिरडी स्थित साईं बाबा के मंदिर के पदाधिकारियों के साथ ऐसा नहीं है। उन्हें बैंक की ओर से कैश देने पर थैंक्यू नहीं बोला जाता, बल्कि बैंक मंदिर का कैश लेने से साफ इंकार कर देती है। इसके लिये बैंक जो कारण बताती है, वो भी बिलकुल प्रेक्टिकल है और हम उसमें बैंक का दोष भी नहीं निकाल सकते।

आपको पूरा मामला बताते हैं। दरअसल शिरडी के सांईं बाबा के मंदिर के दानपात्र में हर रोज हजारों श्रद्धालू अपनी श्रद्धा के अनुसार पैसे डालते हैं। श्रद्धालू रूपये भी चढ़ाते हैं और सिक्के भी। दानपात्र में जमा कराये गये इस चढ़ावे में जो सिक्के हैं उनसे बैंकों को तकलीफ है।
दानपात्र में जमा सिक्कों को लेने से बैंकों ने मना कर दिया। बैंक में सिक्के रखने की जगह न होने का कारण बताते हुए बैंकों ने तकरीबन डेढ़ करोड़ रुपए के सिक्के जमा करने से इनकार कर दिया है।

श्री साईंबाबा संस्थान ट्रस्ट के सीईओ दीपक मुंगलीकर बताते हैं कि इन बैंकों के अलावा आरबीआई से भी समस्या का समाधान सुझाने का आग्रह किया है।

उन्होंने रिजर्व बैंक सहित कई बैंकों को पत्र लिखकर इस समस्या का समाधान निकालने की अपील की है।

उन्होंने कहा, बैंक के अधिकारियों की उपस्थिति में हफ्ते में दो बार मंदिर के दानपात्र की धनराशि की गिनती की जाती है। इस दौरान औसतन 2 करोड़ रुपये के नोट और 5 लाख रुपये के सिक्के गिने जाते हैं।

उन्होंने कहा कि मंदिर के सिक्के और कैश देश के 8 नेशनलाईज्ड बैंकों में रोटेशन बेसिस पर जमा किए जाते हैं।

पिछले कुछ महीनों से बैंक हमें बता रहे हैं कि उनके यहां सिक्के रखने की जगह नहीं है। ऐसे में हमने इन बैंकों के अलावा रिजर्व बैंक को भी इस मुद्दे को सुलझाने के लिए कहा है।

फिलहाल, एसएसएसटी द्वारा एकत्रित डेढ़ करोड़ रुपये के सिक्के बैंकों में जमा होने के लिए तैयार हैं और बैंक की स्वीकृति का इंतजार कर रहे हैं।

देखना है साईं मंदिर की यह समस्या कब दूर होती है।