MeToo की तर्ज पर MenToo : पुरुष भी करेंगे महिलाओं के हाथों हुए यौन शोषण का खुलासा


यौन पीड़ित महिलाओं के मी-टू कैंपेन की तर्ज पर पुरुषों ने महिलाओं के हाथों हुए यौन शोषण का खुलासा करने के लिए मैन-टू अभियान की शुरूआत की है।
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बेंगलुरु (ईएमएस)। यौन पीड़ित महिलाओं द्वारा शुरू किए गए मी-टू कैंपेन की तर्ज पर पुरुषों ने महिलाओं के हाथों हुए यौन शोषण का खुलासा करने के लिए मैन-टू अभियान की शुरूआत की है। बेंगलुरू में 15 लोगों के एक समूह ने ‘मैन-टू’ आंदोलन की शुरुआत की है। इन लोगों में फ्रांस के एक पूर्व राजनयिक भी शामिल हैं, जिन पर सन 2017 में अपनी ही बेटी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था, जिसमें अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है।

मैन-टू आंदोलन की शुरुआत शनिवार को गैर सरकारी संगठन चिल्ड्रंस राइट्स इनिशिएटिव फॉर शेयर्ड पैरेंटिंग (क्रिस्प) ने की। क्रिस्प के राष्ट्रीय अध्यक्ष कुमार वी ने कहा कि समूह लैंगिक तटस्थ कानूनों के लिए संघर्ष करेगा। उन्होंने मांग की कि मी-टू अभियान के तहत झूठे मामले दायर करने वालों को सजा मिलनी चाहिए। यह उल्लेख करते हुए कि मी-टू एक अच्छा आंदोलन है, उन्होंने कहा कि झूठे आरोप लगाकर किसी को फंसाने के लिए इसका दुरुपयोग नहीं किया जाना चाहिए।

कुमार ने कहा कि इस आंदोलन का परिणाम समाज में बड़ी मेहनत से अर्जित किए गए सम्मान को धूमिल करने के रूप में निकला है। उन्होंने कहा कि मी-टू में जहां पीड़िताएं दशकों पहले हुए यौन उत्पीड़न की बात बता रही हैं, वहीं इसके विपरीत मैन-टू आंदोलन में हालिया घटनाओं को उठाया जाएगा।

मीटू आंदोलन के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यदि यौन उत्पीड़न का मामला सच्चा है, तो पीड़िताओं को सोशल मीडिया पर आने की जगह कानूनी कार्रवाई का सहारा लेना चाहिए। इस मौके पर फ्रांस के पूर्व राजनयिक पास्कल मजूरियर भी मौजूद थे, जिन पर अपनी बेटी के यौन उत्पीड़न का आरोप लगा था, लेकिन 2017 में अदालत ने उन्हें बरी कर दिया था। उन्होंने कहा कि मैन-टू आंदोलन मीटू आंदोलन का जवाब देने के लिए नहीं है, बल्कि यह पुरुषों की समस्याओं का समाधान करेगा जो महिलाओं के अत्याचारों के खिलाफ चुपचाप रह जाते हैं।

पास्कल ने कहा कि पुरुषों के पास असली दुख हैं। वे भी पीड़ित हैं, लेकिन वे महिलाओं और अपने दुराचारियों के खिलाफ खुलकर सामने नहीं आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम महिलाओं की सुरक्षा के लिए कानून बनाते हैं। यह अच्छी बात है, लेकिन हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि मानवता का आधा हिस्सा पुरुष हैं। बता दें कि पास्कल अदालती लड़ाई का सामना कर रहे हैं, क्योंकि उनकी पत्नी उन्हें बरी करने के निचली अदालत के फैसले के खिलाफ कर्नाटक हाई कोर्ट चली गई थीं। फ्रांस के पूर्व राजनयिक की पत्नी के पास उनके तीन बच्चों का संरक्षण है।