बैंक को बुजुर्ग के सम्मान को ठेस पहुंचाने की ‎मिली सजा


जब आम आदमी के हक और सम्मान को अगर देश की बड़ी संस्थाएं ठेस पहुंचाती हैं तो इस देश का कानून ऐसी संस्थाओं को भी नहीं बख्शता है।
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नई दिल्ली। जब आम आदमी के हक और सम्मान को अगर देश की बड़ी संस्थाएं ठेस पहुंचाती हैं तो इस देश का कानून ऐसी संस्थाओं को भी नहीं बख्शता है। एक ऐसी ही उदाहरण हालही में देखने को ‎मिला। जब कृष्णा नगर इलाके के 70 वर्षीय बुजुर्ग नियमित रूप से अपना बिजली का बिल जमा कराने जाता है, उन्हें भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। यहीं नहीं एक इन बुजुर्ग को बैंक की गलती से दो बार चेक बाउंस के चलते पेनल्टी झेलनी पड़ी। पीड़ित चेक के जरिए बिजली का बिल जमा कराने गए थे, जहां चेक बाउंस हुआ तो बीएसईएस ने भी उन्हीं पर पेनल्टी लगा दी। पीड़ित को हैरानी हुई क्योंकि उन्होंने बैंक अकाउंट चेक किया, तो उसमें पर्याप्त बैलेंस था। ऐसे में बुजुर्ग ने कन्ज्यूमर फोरम में यह कहते हुए शिकायत दी कि उन्हें पेनल्टी से ज्यादा दुख समाज में अपनी बेइज्जती को लेकर हुआ है। इसलिए उन्हें वह 890 रुपये वापस चाहिए, जो बिना उनकी गलती के उन्हीं के अकाउंट से देने पड़े, जिसमें पर्याप्त बैलेंस नहीं होने की बात कहकर उन पर दो बार चेक बाउंस की 345 रुपये और 200 रुपये की पेनल्टी बीएसईएस की ओर से लगाई गई।

शिकायत बुजुर्ग की पत्नी की ओर से दी गई। उन्होंने बताया कि उनके पति की उम्र 70 साल है, जो 25 जनवरी 2017 को अपने पीएनबी के सेविंग अकाउंट से चेक के जरिए 490 रुपये बीवाईपीएल का बिल भरने के लिए गए थे, जैसा कि वह नियमित रूप से करते थे। ले‎किन बीएसईएस ने उनके चेक को डिसऑनर्ड बता दिया और उनके अकाउंट से 345 रुपये कट गए। बीएसईएस ने 200 रुपये का एक्स्ट्रा चार्ज चेक डिसऑनर होने के चलते लगा दिया। 9 फरवरी को भी बुजुर्ग ने सेम चेक से बिल भरने की कोशिश की, तो फिर से 345 रुपये अकाउंट से कट गए। बुजुर्ग ने फिर से बैलेंस चेक किया तो अकाउंट में 6 लाख से ज्यादा राशि थी। ऐसे में बुजुर्ग ने 20 हजार का हर्जाना और 5 हजार रुपये मुकदमे में आने वाले खर्च को चुकाने की मांग की थी। हालांकि कन्ज्यूमर फोरम ने 890 रुपये, शिकायत वाले दिन के हिसाब से 9 प्रतिशत ब्याज स‎हित चुकाने को कहा। साथ ही 10 हजार रुपये मुआवजे के रूप में दिलाने के निर्देश दिए, जिसमें मुकदमे का खर्च भी शामिल है।

– ईएमएस