सड़क की खुदाई में मिली ट्राम की पटरी


– बेस्ट के संग्रहालय में अब रखा जाएगा ट्राम की पटरी
मुंबई। विकास के साथ-साथ नई चीजें पुरानी चीजों को बदल देती है लेकिन कई बार अतीत अचानक सामने आ जाता है। ऐसा ही एक मामला मुंबई में सामने आया जब दक्षिण मुंबई के फ्लोरा फाउंटेन इलाके में सड़क की खुदाई के दौरान ५० सालों से ज्यादा पुराने ट्राम के पटरी मिले हैं। जी हां, मुंबई में इतिहास बन चुकी ट्राम अचानक से चर्चा में आ गई है। दरअसल सड़क की खुदाई में उसकी पटरी मिलने से एक बार फिर से मुंबई के लोगों में ट्राम की याद ताजा हो गई है। लोग बड़ी संख्या में इतिहास बन चुकी ट्राम की निशानी देखने के लिये उमड़ रहे हैं। नई पीढ़ी के लिए पटरी आकर्षण का केंद्र बन गई है तो पुरानी पीढ़ी के लोगों के लिये पुरानी याद ताजा करने का मौका। बहरहाल ट्राम ना सही उसकी निशानी देख ही नई पीढ़ी के नौजवान खुश होते दिख रहे हैं।
– सड़क की खुदाई में मिली ट्राम की पटरियां
पिछले दिनों दक्षिण मुंबई के फ्लोरा फाउंटेन इलाके में सड़क की खुदाई में ये पटरियां बिछी मिलीं। पहले तो मजदूरों को समझ नहीं आया लेकिन जल्द ही लोगों को ये समझते देर नहीं लगी कि ये पटरियां उस ट्राम की हैं जो १९६४ तक मुंबई की शान हुआ करती थी। यह ट्रैक १०० मीटर लंबे हैं और दो-दो की जोड़ी में हैं। मुंबई में पहले कोलाबा से परेल तक आने-जाने के लिए ट्राम का इस्तेमाल होता था। बहरहाल अधिकारियों ने ट्राम की पटरियों को हटा दिया है और अब इन्हें बेस्ट के संग्रहालय में रखा जाएगा।
– १८७४ में ट्राम को अंग्रेज हिन्दुस्तान लाए
उल्लेखनीय है कि अंग्रेज १८७४ में ट्राम को हिन्दुस्तान लाए, उस वक्त इसे घोड़े खींचते थे। मुंबई में पहली ट्राम सेवा ९ मई १८७४ में शुरू हुई थी जिसके बाद इसे ३१ मार्च १९६४ को बंद कर दिया गया था। पहली ट्राम परेल से कोलाबा के बीच चलती थी जिसे ६-८ घोड़े खींचते थे। लंबे समय तक इन ट्राम्स को घोड़े से खींचे जाने के बाद मई १९०७ में बिजली से चलने वाली ट्राम सेवा शुरू की गई। मुंबई शहर का कोलाबा जंक्शन इन ट्राम का मुख्य जंक्शन था। लेकिन १९२६ में पहियों पर दौड़ने वाली बसों के आगे ट्राम हांफने लगी, १९६४ में उसने बंबई में दम तोड़ दिया।