सोशल मीडिया का उपयोग बच्चों के लिए खतरा


ब्रिटेन। आधुनिक जीवनशैली के दबाव में बच्चों में अकेलापन और आत्मसम्मान में कमी की समस्या बढ़ती जा रही है। चाइल्डलाइन चैरिटी ने यह चेतावनी दी है। ३०वीं वर्षगांठ मना रही इस चैरिटी ने कहा कि नए मुद्दे जैसे साइबर बुिंलग और सोशल मीडिया बच्चों के आत्मविश्वास को प्रभावित कर रहा है। चैरिटी ने चेतावनी दी है कि देश में गहरे दुखी युवा डर और िंचता का सामना कर रहे हैं, जो तीन दशक पूर्व मौजूद नहीं था। १९८६ में जब २४ घंटे चालू रहने वाली हेल्पलाइन की शुरूआत की गई थी, तो बच्चों की प्रमुख िंचता में यौन शोषण, पारिवारिक समस्याओं, शारीरिक शोषण और गर्भावस्था जैसी बाते हुआ करती थीं। पिछले साल प्रमुख मुद्दों में पारिवारिक संबंध, कम आत्म-सम्मान और दुख, साइबर बुिंलग और आत्म-नुकसान पहुंचाने जैसे मामले शामिल थे। बच्चों ने अपनी ऑनलाइन इमेज, सोशल मीडिया के दोस्तों के जुड़ने और सेलिब्रिटीज के जैसी परपेâक्ट बॉडी को कॉपी करने के बारे में िंचता जाहिर की थी। संचालित सेवा ने २०१४/१५ में कुल ३५ हजार २४४ मामलों में काउंसिंलग की थी, जो कम आत्म-सम्मान और दुख से जुड़े थे। यह आंकड़ा पूर्ववर्ती वर्ष से नौ फीसद अधिक था। काउंसिंलग सेशन की संख्या में भी काफी बढ़त देखी गई। साल १९८६-८७ में जहां २५ हजार ५३० ऐसे सत्र किए गए थे वहीं, साल २०१४-१५ में दो लाख ८६ हजार ८१२ काउंसिंलग सेशन किए गए। चीफ एग्जिक्यूटिव पीटर वॉनलेस ने बताया कि चाइल्डलाइन को किए गए हजारों फोन कॉल से यह स्पष्ट पता चलता है कि यह सबसे ज्यादा दुखी बच्चों का देश है। दोस्तों के साथ बने रहना और ऑनलाइन में परपेâक्ट लाइफ का दबाव बच्चों के दुख को और बढ़ा रहा है, जो कई युवा पुरुष रोजमर्रा की िंजदगी में महसूस करते हैं।