सुंदरवन का अस्तित्व खतरे में


कोलकाता । सुंदरवन के जल में तेजी से बढ़ती लवण की मात्रा से आने वाले दशकों में वहां की वनस्पतियां नष्ट हो सकती हैं, जिससे मनुष्यों व बाघों के बीच संघर्ष बढ़ने की आशंका है। हाल में हुए एक सर्वेक्षण में ये गंभीर तथ्य सामने आए हैं।
प्रधान मुख्य वन संरक्षक अतनु राहा ने बताया कि सुंदरवंस टाइगर रिजर्व (एसटीआर) के उत्तरी/मध्य वनांचलों में वनस्पतियों की मात्रा में तेजी से कमी हो रही है। एसटीआर के पाqश्चमी वनांचलों में भी, खासकर सुंदरी पेड़ों का घनत्व कम होता जा रहा है।
इसकी मुख्य वजह पानी में लवण की मात्रा बढ़ना है। इसका यहां वास करने वाले रायल बंगाल टाइगर एवं उनके मुख्य भोजन हिरणों पर सबसे ज्यादा प्रभाव पड़ेगा।
वर्ष २०५० तक ज्यादातर घने वन कम घनत्व एवं खुले क्षेत्र में तब्दील हो जाएंगे, जिससे मनुष्यों एवं जंगली जानवरों के बीच संघर्ष बढ़ने की आशंका है। ऐसा हुआ तो दुनिया के इस सबसे बड़े डेल्टा क्षेत्र में दीर्घकालीन संरक्षण प्राप्त रायल बंगाल टाइगर का वजूद खतरे में पड़ जाएगा।
यह सर्वेक्षण हैदराबाद ाqस्थत नेशनल रिमोट सेंिंसग सेंटर के सहयोग से किया गया है। अनुसंधान में सुंदरवन के पिछले १५ वर्षों के आंकड़े का बारीकी से विश्लेषण किया गया है।
राहा के मुताबिक आने वाले वर्षों में सुंदरवन में सुंदरी, पाइन, केवड़ा जैसे पेड़ विलुप्त हो जाएंगे, जिसके कारण हिरणों के सामने भोजन की समस्या उत्पन्न होगी, जो इन पेड़ों की पत्तियां खाते हैं। उन्हें भोजन नहीं मिलने से उनकी आबादी कम हो जाएगी, जिससे बाघों के सामने भोजन की समस्या खड़ी हो जाएगी। इससे वे रिहायशी इलाकों का रुख करेंगे जिससे मनुष्यों व बाघों में संघर्ष बढ़ेगा।