सात दशक से जल रही आग


कांगड़ा। हिमाचल की पहचान देव भूमि के रूप में है। यहां धारणा है कि कई देवी-देवताओं का वास है। इन्हीं में से नौ धार्मिक स्थल ऐसे हैं जहां आग जल रही है। इसे लोगों की धारणा के अनुसार ज्वाला नाम से पहचाना जाता है। यह लगभग सात दशक से अनवरत जल रही है। वैज्ञानिक भी इसकी शोध में अब तक कोई निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सके हैं।
जानकारी के अनुसार हिमाचल के एक मंदिर में सदियों से ९ प्राकृतिक ज्वालाएं जल रही हैं, इनका रहस्य जानने के लिए पिछले करीब ७० सालों से भू-वैज्ञानिक लगे हुए हैं, लेकिन ९ किलोमीटर खुदाई करने के बाद उन्हें आज तक वह जगह ही नहीं मिली जहां पर प्राकृतिक गैस निकलती हो। उन्हें आज तक इसके बारे में कुछ पता नहीं चल सका। इस मंदिर में प्राकृतिक रूप से निकलने वाली ज्वालाओं का रहस्य न तो बादशाह अकबर जान पाया था और न ही अंग्रेज। बताया जा रहा है कि ज्वाला देवी का मंदिर हिमाचल प्रदेश में कांगड़ा शहर से ३० किलोमीटर की दूरी पर ाqस्थत है। मंदिर को खोजने का श्रेय पांडवों को जाता है। खास बात तो यह है कि इसकी गिनती माता के प्रमुख शक्ति पीठों में होती है। ऐसी मान्यता है कि यहां देवी सती की जीभ गिरी थी। सूत्रों के मुताबिक आजादी के बाद भूगर्भ वैज्ञानियों ने मंदिर में जल रही ज्वालाओं के राज को जानने का प्रयास किया था लेकिन वह सफल नहीं हुए।
करीब ७० साल बीत जाने के बाद आज भी मंदिर के आसपास के इलाकों को कई किलोमीटर तक खोदा जा रहा है, लेकिन तेल या नेचुरल गैस का कोई अता-पता नहीं चल पा रहा है। माना जाता है कि ज्वाला मां के इस मंदिर में निकलने वाली ज्वाला चमत्कारिक है। इतिहास इस बात का भी गवाह है कि मुगल सम्राट अकबर लाख कोशिशों के बाद भी इसे बुझा नहीं पाया था। मंदिर में जलती हुई ज्वालाओं को देखकर अकबर के मन में संदेह हुआ था। उसने अपनी सेना को मंदिर में जल रही ज्वालाओं पर पानी डालकर बुझाने को कह दिया था। ज्वालाओं को बुझाने के लिए नहर खुदवाई गई थी, लेकिन यह कोशिश भी उसकी असफल रही थी।
ये है ९ ज्वालाओं के रूप यह मंदिर देवी के अन्य मंदिरों की तुलना में अनोखा है क्योंकि यहां पर किसी र्मूित की पूजा नहीं होती है बाqल्क पृथ्वी के गर्भ से निकल रही ९ ज्वालाओं की पूजा होती है। जिनके ऊपर ही मंदिर बना दिया गया है। इन ९ ज्योतियों को महाकाली, अन्नपूर्णा, चंडी, िंहगलाज, िंवध्यवासिनी, महालक्ष्मी, सरस्वती, अंबिका, अंजीदेवी के नाम से जाना जाता है।