शादी के बाद सरनेम बदलने के पक्ष में नही महिलाएं


कोलकाता।माता-पिता आज के युग में बेटी एवं बेटे की परवरिश में फर्वâ नही करते हैं वही बेटियां भी अब शादी के बाद भी अपने माता -पिता के सरनेम को लिखने में प्राथमिकता देती हैं ताकि उनके पैतृक उपनाम उनसे जुड़ा रहे।शादी के बाद ४० फीसदी से ज्यादा भारतीय महिलाएं अपना सरनेम नहीं बदलना चाहतीं। महिला दिवस से पहले जारी एक सर्वे में यह बात सामने आई है।’शादी डॉट कॉम’ की तरफ से किए गए सर्वे में अविवाहित महिलाओं से जब उनके विचार मांगे गए तो ४०.४ फीसदी ने कहा कि शादी के बाद वे अपना उपनाम नहीं बदलना चाहतीं।अन्य २७ फीसदी ने बताया कि शादी के बाद वे र्आिथक रूप से स्वतंत्र रहना चाहेंगी जबकि १८ फीसदी महिलाओं ने कहा कि वह चाहती हैं कि पुरूष भी परिवार की जिम्मेदारी में बराबर की भागीदारी निभाएं।१४ फीसदी से ज्यादा ने कहा कि वे चाहेंगी कि उनके पति उनके अभिभावकों को भी अपने अभिभावकों की तरह मानें. ऑनलाइन सर्वेक्षण में ११ हजार २०० अविवाहित महिलाओं ने हिस्सा लिया जिनकी उम्र २४ से ३८ वर्ष के बीच थी।