शराब पीने पर घर में ‘नो एंट्री’


कटिहार । एक अप्रैल से सूबे में देसी शराब की बिक्री पर पाबंदी लग जाएगी। बरारी प्रखंड के तिरहुतिया महादलित टोले में इसका असर अभी से ही दिखने लगा है। यहां की महिलाओं ने पुरुषों के लिए शराब पीकर घर नहीं आने का फरमान जारी कर दिया है। इस पर वे कड़ाई से अमल भी कर रही हैं। महिलाएं शराब पीने और अवैध रूप से बेचने वालों को थाने तक पहुंचाने का भी काम कर रही हैं। अब तक वे सात अवैध कारोबारियों को थाने पहुंचा चुकी हैं। वे थाने में अवैध कारोबारियों की शिनाख्त भी कर रही हैं। कई स्थानों पर तो वे पंचायत कर गांव में शराब बेचने एवं पीने वालों को सबक सिखाने का बिगुल भी पूंâक रही हैं। साथ ही शराब पीने के आदी अपने पति सहित अन्य पारिवारिक सदस्यों का हुक्का-पानी बंद करने की शपथ भी ले रही हैं। इतना ही नहीं, शराब बेचने व पीने वालों पर महिलाओं की टोली नजर भी रख रही है। इसी तरह कोढ़ा प्रखंड के मधुरा गांव की महादलित महिलाओं ने पंचायत कर मद्य निषेध को लेकर शपथ लिया है। महिलाओं ने कहा कि उनके गांव में शराब पीने व बेचने वालों के लिए कोई जगह नहीं होगी। महादलित महिलाओं की इस पहल की चर्चा हर ओर हो रही है।
पिछले दस मार्च को गांव के सात घरों में शराब बेचे जाने की शिकायत लेकर डेढ़ दर्जन महिलाएं थाना पहुंच गर्इं। पुलिस को छापेमारी करने को कहा। महिलाओं ने थानाध्यक्ष को सभी के नाम भी बताए। पुलिस अवैध रूप से शराब बेचने वाले एक व्यक्ति को पकड़ कर थाना लायी। पहचान करने के लिए बुलाए जाने पर बड़ी संख्या में महिलाएं थाना पहुंच गर्इं। परवतिया देवी, अनिता देवी, सोमिया देवी, पूâलिया देवी, बिजली देवी आदि ने बताया कि गांव में शराब बेचने को उन्होंने मना किया गया था। नहीं मानने पर सबक सिखाने का निर्णय लिया गया। चार सौ की आबादी वाला यह गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। लेकिन, महिलाओं की इस पहल ने नया संदेश देने का काम किया है। अभियान से जुड़े साक्षरता समिति के विमल मालाकार ने बताया कि महादलित गांवों में कला जत्था के कार्यक्रम से नई जागृति आ रही है। महिलाओं ने भी स्वीकार किया कि कला जत्था द्वारा आयोजित नुक्कड़ नाटकों से शराब से होने वाले कुप्रभाव को वे समझ सकी हैं।