भालू की नई पीढ़ी खतरे में


नई दिल्ली। आर्वâटिक क्षेत्र में जीव-जंतुओं के लिए खाद्य सामग्री की कमी हो गई है जिसके चलते ध्रुवीय भालू अपने ही बच्चे को खाने पर मजबूर हो गए है। ग्लोबल वाा\मग का असर मैदानों के साथ समुद्र, पर्वत और ध्रुवीय इलाकों में घातक रूप में सामने आने लगा है। ध्रुवीय भालू के अपने ही बच्चे को खाने की घटना से यह बात सामने आई है कि अब समुद्र के चंचल प्राणी सी-लायन की नई पीढ़ी खतरे में है। भोजन न मिलने के कारण ध्रुवीय भालू द्वारा भूख मिटाने के लिए अपने ही वंश को मिटाने की कनाडा के द्वीप की घटना वैâमरे में वैâद हो चुकी। मादा भालू ने बच्चे को बचाने की कोशिश की लेकिन नर ने उस पर भी हमला किया, उसे भाग कर जान बचानी पड़ी। मौसम में बदलाव जारी रहा तो ऐसी घटनाएं आम हो सकती हैं। ध्रुवीय भालू के व्यवहार में आए बदलाव पर शोध करने वाले विज्ञानियों ने पाया कि मादा भालू अधिक भूखी होने पर भी बच्चे का बचाव करती है लेकिन नर से झगड़ने से बचना चाहती है। नर भालू शिकार के लिए बर्पâ को प्लेटफार्म की तरह इस्तेमाल करता है। बर्पâ की शीट पिघलने के कारण शिकार के लिए अधिक दूर नहीं जा सकता। विश्व संस्था नेशनल ज्योग्राफिक एक्स्पीडिशन ने इस पर अलर्ट किया है।
साथ ही प्रशांत महासागर का पानी लगातार गर्म होने से उसकी वनस्पति से पोषक तत्व खत्म हो रहे हैं, शैवाल उत्पन्न नहीं हो रहा। समुद्र जल की प्रकृति बदलने में अल निनो भी कदमताल कर रहा है। शोधकर्ता सेली केटल ने इक्वाडोर के आसपास ाqस्थत गेलापेगोज आइलैंड व अन्य द्वीपों पर गहन शोध किया और पाया कि प्रशांत महासागरीय जल का तापमान बढ़ने से सी लॉयन के बच्चों का जीवन कठिन हो गया है। मूंछदार चेहरा, बड़ी आंखें, थुलथुला शरीर तथा छोटी-सीधी पूंछ इस जीव को सबसे अलग पहचान देती है। शोधकर्ता को आशंका है कि साल के अंत तक समुद्र तट पर सी-लायन का शायद एक भी बच्चा दिखाई न दे। वहां सामान्य से १५ गुना अधिक वर्षा हो सकती है जो समुद्री क्षेत्र के लिए विनाशकारी है। आवश्यक पोषक तत्वों की कमी के कारण समुद्री जीवों की मृत्यु दर तेजी से बढ़ रही है। सी-लायन, समुद्री पक्षी तथा सील की प्रजनन क्षमता बुरी तरह प्रभावित हो चुकी। १९९८ में अल निनो के कारण वहां सील के सभी बच्चों की मृत्यु हो गई थी, इस बार ऐसा सी-लायन के बच्चों के साथ होने की आशंका है। पानी गर्म होने से शैवाल(समुद्री काई) नहीं पैदा हो रही जो भोजन का मुख्य स्रोत है।