भारत में संस्कृत के स्थान पर होगी जर्मन भाषा !


० जब जर्मनी में हिन्दी पर होगें भारत जैसे समान मापदण्ड
० जर्मनी स्वूâलों में समान संख्या में भारतीय भाषा अध्ययन का मापदण्ड
० जर्मन अध्ययन से राष्ट्रीय शिक्षा नीति की त्रिभाषा सूत्र का उल्लंघन
नईदिल्ली। देश भर के वेंâद्रीय विद्यालयों में तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन की पढ़ाई बंद करने के छह महीने बाद मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस महीने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जर्मनी यात्रा से पहले इस विवाद को सुलझाने की कोशिश की है। नए समझौते के तहत जर्मन को वेंâद्रीय विद्यालयों में वैकाqल्पक विषय के तौर पर पढ़ाया जाएगा और इसके बदले में जर्मनी में समान संख्या में स्वूâलों को िंहदी या किसी अन्य भारतीय भाषा की कक्षाएं शुरू करनी होगी। मंत्रालय सूत्रों की माने तो सरकार अगले कुछ दिनों में जर्मनी के वार्ताकारों से समझौते की नई शर्तों पर बात करेगी। इस समझौते पर विदेश मंत्रालय ने विचार किया है। नए सहमति पत्र (एमओयू) पर वेंâद्रीय विद्यालय संगठन और गोथ इांqस्टट्यूट की ओर से हस्ताक्षर किए जाएंगे। विदेश मंत्रालय ने पिछले वर्ष दिसंबर में मानव संसाधन विकास मंत्रालय से जर्मन भाषा विवाद को लेकर सभी मुद्दे सुलझाने के लिए कहा था क्योंकि इससे मोदी की जर्मनी यात्रा पर असर पड़ने की आशंका थी। मोदी को जर्मनी में होने वाले दुनिया के सबसे बड़ी इंडाqस्ट्रयल पेâयर हनोवर में हिस्सा लेना है। भारत इस पेâयर में चीफ गेस्ट है। इससे पहले अमेरिका और चीन पिछले वर्षों में पेâयर के चीफ गेस्ट रह चुके हैं। प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) सरकार के मेक इन इंडिया प्रोग्राम के लिए इसे महत्वपूर्ण मान रहा है।
सूत्रों ने १ जनवरी को रिपोर्ट दी थी की तत्कालीन विदेश सचिव सुजाता िंसह ने एक दो पेज के पत्र में एचआरडी सेव्रेâटरी आर भट्टाचार्य से जर्मन पक्ष से बात करने और मोदी की ओर से जर्मनी की चांसलर एंजेला मार्वेâल को पिछले वर्ष नवंबर में ब्रिस्बेन में दिए गए आश्वासन को पूरा करने को कहा था। इस पत्र में कहा गया था कि वेंâद्रीय विद्यालयों में जर्मन भाषा की पढ़ाई जारी रखने का तरीका खोजा जाए, लेकिन यह तीसरी भाषा के तौर पर नहीं होनी चाहिए। तीसरी भाषा के तौर पर जर्मन की पढ़ाई बंद करने और इसकी जगह संस्कृत को देने के सरकार के आदेश की िंनदा हुई थी और इससे दोनों देशों के बीच राजनियक विवाद भी पैदा हो गया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने इस पैâसले का पक्ष लेते हुए कहा था कि स्वूâलों में तीसरी भाषा के तौर पर कोई विदेशी भाषा नहीं पढ़ाई जा सकती क्योंकि इससे राष्ट्रीय शिक्षा नीति में मौजूदा तीन भाषा के फॉम्र्युले का उल्लंघन होता है। मंत्रालय सूत्रों के अनुसार जर्मनी में बातचीत के दौरान यह विवाद उठ सकता है। हालांकि, एमओयू पर तुरंत साइन नहीं किए जाएंगे। हमें यह सुनिाqश्चत करना होगा कि यह मुद्दा सुलझ जाए और प्रधानमंत्री के आश्वासन पर सरकार खरी उतरे।