प्रतिदिन बढ़ते शहरीकरण से लोग सूरज की रोशनी से मोहताज


मुंबई। एक नए अध्ययन में पता चला है कि दिन प्रति दिन बढ़ते शहरीकरण के चलते लोगों तक सूरज की रोशनी पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंच पा रही है। सूरज की रोशनी से इंसान के शरीर को प्राकृतिक रूप से विटामिन डी मिलता है, जो शरीर में वैâाqल्शयम के अवशोषण में सहायक होता है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि करीब २० लाख साल पहले, सूर्य की रोशनी में मौजूद पराबैंगनी किरणों की इंसान के शरीर पर होने वाली अभिक्रिया को नियंत्रित करने के लिए मेलानिन नामक वर्णक का विकास मानव शरीर में शुरू हुआ था। मेलानिन की वजह से ही त्वचा का रंग काला होता है। मेलानिन मनुष्य के शरीर में सूर्य की किरणों से होने वाली अभिक्रिया को संतुलित बनाए बनाए रखने में सहायक है। यह एक तरफ शरीर को विटामिन डी की पर्याप्त मात्रा के लिए पाराबैंगनी किरणें उपलब्ध कराता है और दूसरी तरफ शरीर को किरणों के दुष्प्रभाव से बचाता है। उनके अनुसार आज अधिकतर लोग शहरों में रहते हैं और बहुत सीमित मात्रा में सूर्य की रोशनी उन तक पहुंच पाती है। उनका कहना है कि सूरज की पर्याप्त रोशनी न मिलने के कारण कई लोगों के शरीर में विटमिन डी की कमी हो सकती है।