देश के 18 मासूमों को वीरता पुरस्कार


नई दिल्ली ( ईएमएस)। बड़े-बड़े जहां बहादुरी नहीं दिखा पाते वहां बच्चों ने साहस दिखाकर देश का नाम रोशन किया। अपनी बहादुरी से दूसरों की जान बचाने वाले देशभर के 18 बच्चों को वीरता पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इनमें से तीन बच्चों को मरणोपरांत बहादुरी के इनाम से नवाजा गया है। भारतीय बाल कल्याण परिषद (आईसीसीडब्ल्यू) हर साल ऐस बच्चों को सम्मान करती है। 24 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इन बच्चों को इनाम से नवाजेंगे। आईसीसीडब्ल्यू की अध्यक्ष गीता के अनुसार- भारत पुरस्कार आगरा की 18 वर्षीय नाजिया जुआ, सट्टा और नशीले पदार्थ की बिक्री को बंद कराई। वहीं गीता चोपड़ा पुरस्कार मरणोपरांत कर्नाटक की 14 साल की नेत्रवती को दो बच्चों को डूबने से बचाने के लिए दिया जा रहा है। संजय चोपड़ा पुरस्कार पंजाब के 17 वर्षीय करनवीर को उन बच्चों को बचाने के लिए दिया जा रहा है जो उसके साथ उस स्कूल बस में थे जो एक नहर में गिर गई थी। ओडिशा की सबसे छोटी बच्ची ममता दलाई ने एक बच्चे को मगरमच्छ के मुंह से खींच लिया था। साथ ही अपनी चीखों से मगरमच्छ को वापस पानी में जाने को मजबूर कर दिया था। छत्तीसगढ़ की लक्ष्मी यादव, मेघालय से बेट्श्वाजॉन पेनलांग, केरल के सेबासटियन विनसेंट, नागालैण्ड की मनशा और चिंगई वांग्सा को दिया जा रहा है। गुजरात की समृद्धि सुशील शर्मा, मिजोरम के जोनुनतुआंगा और ललछंदामा, उत्तराखण्ड के पंकज सेमवाल, महाराष्ट्र के नदाफ इजाज अब्दुल रॉफ, मणिपुर की चनु, ओडिशा के पंकज कुमार माहंत को भी बहादुरी का वीरता पुरस्कार दिया जा रहा है।