थेवा कला का नाम इंडिया ”बुक ऑफ रिकाडर््स-2015“ में दर्ज


नई दिल्ली। दक्षिणी राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले की विश्व प्रसिद्ध `थेवा कला’ ने एक और अनूठी उपलाqब्ध हासिल की है। नई दिल्ली से प्रकाशित ”इंडिया बुक ऑफ रिकार्डस-२०१५“ में थेवा कला का नाम भी दर्ज किया गया है। नई दिल्ली के पास सूरजवुंâड रोड़ पर ाqस्थत होटल एट्रिम में आयोजित बुक लॉिंचग समारोह में थेवा कला के लिए पद्मसम्मान के लिए नामित महेश राजसोनी को सम्मानित किया गया।
समारोह में पुस्तक के मुख्य सम्पादक डॉ. विश्वास चौधरी और प्रबंध सम्पादक मनमोहन िंसह रावत सहित अन्य गणमान्य लोग मौजूद थे। उल्लेखनीय है कि राजसोनी को गणतंत्रा दिवस पर घोषित पद्मअवार्ड सूची में शामिल किया गया है। राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी आगामी आठ अप्रेल को राष्ट्रपति भवन में उन्हें पद्मअलंकरण से सम्मानित करेंगे। सोनी ने बताया कि इससे पूर्व थेवा कला का नाम ”लिम्का बुक ऑफ रिकाड्र्स-२०११“ में भी दर्ज है। साथ ही भारत सरकार द्वारा, थेवा कला की प्रतिनिधि संस्था `राजस्थान थेवा कला संस्थान’ प्रतापगढ़ को इस बेजोड़ कला के संरक्षण में विशेषीकरण के लिए वस्तुओं का भौगोलिक उपदर्शन (रजिस्ट्रीकरण तथा सरंक्षण) अधिनियम, १९९९ के तहत् “ज्योग्राफिकल इंडीकेशन संख्या का प्रमाण-पत्र” प्रदान किया गया है। उल्लेखनीय है कि ज्योग्राफिकल इंडीकेशन किसी उत्पाद को उसकी स्थान विशेष में उत्पत्ति एवं प्रचलन के साथ विशेष भौगोलिक गुणवत्ता एवं पहचान के लिए दिया जाता है।
सोनी ने बताया कि प्रतापगढ़ की थेवा कला अपनी विशेष सिद्धहस्त कला के लिए पूरी दुनियॉ में प्रसिद्ध है तथा भौगोलिक उपदर्शन संख्या मिलने से यह कला अपनी भौगोलिक पहचान को अच्छी तरह से कायम रखने में कामयाब हो रही है। उन्होंने बताया की राजस्थान के प्रतापगढ़ की अनोखी थेवा कला चार सौ वर्ष से भी पुरानी है। यह कला रंगीन कांच पर सोने की बारीक नक्काशी के कारण अनूठी एवं बेजोड़ है और देश-विदेश में अपनी खास पहचान को कायम रख विश्व कला परिदृश्य में छाई हुई है। सोनी ने बताया कि ”इंडिया बुक ऑफ रिकाडर््स-२०१५“ पुस्तक में प्रतापगढ़ में कार्यरत १६ राजसोनी परिवार का विशेष रूप से उल्लेख है। राजसोनी परिवार के १६ सदस्यों ने अनूठी थेवा कला को िंजदा रखा है। थेवा कला एक ऐसी कला है जिसमें शीशे के ऊपर पतले धागे से बेहतरीन उभारदार नक्काशी की जाती है। राजसोनी परिवार के सभी १६ सदस्यों को राष्ट्रीय पुरस्कारों और राज्य पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। इनमें पद्मके लिए नामित महेश राजसोनी सहित आठ व्यक्ति राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित है।