चुंबकीय क्षेत्र का रहस्य काप्पा सेती में मिला


वॉिंशगटन। पृथ्वी पर जीवन के लिए चुंबकीय क्षेत्र का भी महत्व है। यह बात सूर्य से मिलते-जुलते तारे काप्पा सेती के अध्ययन से पता चली है।
जानकारी के अनुसार अमेरिका के हार्वर्ड-ाqस्मथसोनियन सेंटर फॉर एस्ट्रोफिजिक्स (सीएफए) और ब्राजील के रियो ग्रांडे डो नोर्ट विश्वविद्यालय के जोस डायस ने कहा, `लोगों के रहने योग्य परिाqस्थतियों के लिए एक ग्रह को उष्मा, जल और एक नये और प्रचंड उर्जा वाले सूर्य की आवश्यकता होती है।’ काप्पा सेती सूर्य से बहुत हद तक मिलता-जुलता है लेकिन वह अपेक्षाकृत रूप से नया है। दल की गणना के अनुसार नये तारे की आयु केवल ४०-६० करोड़ वर्ष है। अनुसंधानकर्ताओं ने कहा है कि काप्पा सेती के अध्ययन के निष्कर्ष से हमारे सौरमंडल की शुरआत के संकेत मिलते हैं। इतने ही वर्ष पुराने अन्य तारों की तरह काप्पा सेती भी चुंबकीय रूप में बहुत अधिक सक्रिय है। अनुसंधानकर्ताओं ने पाया कि इस तारे की हवा सौर पवन से ५० गुना अधिक ताकतवर है। उन्होंने कहा कि कोई ग्रह अगर चुंबकीय क्षेत्र से घिरा हुआ नहीं हो तो इतनी शक्ति की हवा किसी भी ग्रह के रहने योग्य क्षेत्र को बहुत अधिक नुकसान पहुंचाएगी। सबसे चरम ाqस्थति में चुंबकीय क्षेत्र के बिना कोई ग्रह अपने वातावरण का अधिकतर हिस्सा खो देगा। हमारे सौर मंडल में मंगल ग्रह को इस ाqस्थति का सामना करना पड़ा और वह अब बिल्कुल ठंडे और सूखे रेगिस्तान के रूप में बदल गया है।