चीटियां बनाती है ‘भूलभुलैया’ जैसा घोंसला


कोलकाता। जीव विज्ञानियों के एक समूह ने जैव विविधता वाले पाqश्चमी घाटों में चींटियों की एक नई प्रजाति का पता लगाया है जो क्षैतिज दीर्घाओं की एक बड़ी ‘भूलभुलैया’ जैसा घोंसला बनाती है। बेंगलूर ाqस्थत अशोका ट्रस्ट फॉर रिसर्च इन इकोलॉजी एंड एनवायरनमेंट (एटीआरईई) ने एनोचेटस डेडलस नामक इस प्रजाति को हाल ही में कर्नाटक में खोजा है। ‘करेन्ट साइंस’ जर्नल में इस खोज के बारे में जानकारी दी गई है। एटीआरईई के अनुसंधानकर्ता प्रियदर्शन धर्म राजन ने बताया ‘सिरसी के हेगाराने गांव में जंगलों से गुजरते हुए हमने मिट्टी का एक बड़ा ढांचा देखा। यह बिल्कुल भूलभुलैया वाला था। इसकी रचना जानने की उत्सकुता के चलते हमें उसे खोदा और उसकी क्षैतिज दीर्घाओं में कुछ चींटियों को चलते देखा।’
इस प्रजाति की चींटियों का जबड़ा आम चींटियों की तुलना में बड़ा है। उनके जबड़े चिमटी की तरह हैं। इन जबड़ों की सहायता से चींटी अपने शिकार को इतनी ताकत से दबाती है कि उसके टुकड़े हो जाते हैं। एनोचेटस उस मांसभक्षी चींटी कुल में आती है जो दुनिया के उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय इलाकों में पाई जाती हैं। ये छोटे घर बनाती हैं और एक कालोनी में करीब १०० चींटियां रहती हैं। स्वभाव से ये चींटियां बेहद शर्मीली होती हैं। राजन के अनुसार, ये चींटियां श्रीलंका में १२५ साल पहले पाई जाने वाली एनोचेटस नाइटनेरी प्रजाति की चींटियों से बहुत कुछ मिलती जुलती हैं।