खाकी ड्रेस नहीं पहनेंगे डाकिए


नई दिल्ली । आपके जेहन में डाकिए की छबि अब तक हल्की भूरी खाकी ड्रेस पहने हुए एक शख्स वाली रही है लेकिन अब उनका कॉर्पोरेट मेकओवर होने जा रहा है। इस मेकओवर के तहत डल खाकी बाहर हो जाएगी और वे बेसबॉल वैâप के साथ एक कलरपुâल वर्दी में नजर आएंगे। ई-कॉमर्स क्षेत्र में तेजी से बढ़ती प्रतियोगिता के चलते अब हजारों पुरुष व महिला डाकिए जल्दी ही नए अवतार में दिखेंगे। यह कदम भारतीय डाक के भुगतान बैंक स्थापित करने की योजना के साथ शुरू होगा जहां डाकियों को स्मार्टफोन और आईपैड्स भी दिए जाएगं जिससे उन्हें घर-घर जाकर लेनदेन की सुविधा में मदद मिल सवेंâ।
एक सूत्र के मुताबिक ‘ वे वास्तम में प्रतिस्पर्धात्मक होना चाहते हैं। भारत के लॉजिाqस्टक सेक्टर में ई-कॉमर्स में तेजी के साथ एक बड़ा परिवर्तन आया है। कई नई वंâपनियां तेजी के साथ अपना व्यापार कर रही है। भारतीय डाक नए खिलाडियों के साथ टक्कर लेने के लिए एक बड़े कदम के हिस्से के रूप में वर्दी को नया स्वरूप देने जा रही है।’ मार्वेâट रिसर्चर नोवोनोअस के मुताबिक इंडियन लॉजिाqस्टक्स इंडस्ट्रटी अभी ३०००० करोड़ डॉलर की है और साल २०२० तक १२ प्रतिशत चक्रवृद्धि र्वािषक दर के साथ बढ़ने की उम्मीद है। ाqफ्लपकार्ट और स्नेपडील जैसी ई-कॉमर्स वंâपनियां डिलीवरी टाइम में कटौती करने के लिए इस सेक्टर में निवेश करने की योजना बना रही है। ाqफ्लपकार्ट ने घोषणा की है कि वह आने वाले चार सालों में लॉजिाqस्टक्स में २०० करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। डाकिए के नए कपड़ों की बात करें तो सूत्रों का कहना है कि कई रंगों को अभी देखा जा रहा है लेकिन गहरा नीला-हरा अंतिम पसंद हो सकती है और इसका पेâब्रिक भी ज्यादा आरामदायक होगा। एक अधिकारी ने बताया ‘ वर्तमान वर्दी में ६७ प्रतिशत पॉलिएस्टर और ३३ प्रतिशत विस्कोस का मिश्रण है। यह टिकाऊ और कम रखरखाव वाला है लेकिन हमारे क्लाइमेट के हिसाब से बेहद असहज है। वहीं शर्ट और पेंट दोनों का मटेरियल एक जैसा है जो कि व्यावहारिक नहीं है।’वे कहते हैं ‘एक सामान्य दिन में डाकिए को २० से २५ किलोमीटर २० किलो के बैग के साथ चलना होता है। ऐसे में यह आरामदायक नहीं है।’ कॉटन और पॉलिएस्टर के खादी पेâब्रिक का मिश्रण पॉली-वस्त्र इसके लिए चुना गया था लेकिन डाकिए इसके रखरखाव में ज्यादा परेशानी के चलते इसके इच्छुक नहीं थे।