अब चाय चबाएं


मुंबई। चाय हम सब प्रतिदिन सुबह शाम तरोताजा रहने के लिए पीते है लेकिन अब यह पेय पदार्थ ‘चबाने’ के रूप में भी लोकप्रिय हो रहा है। इतना ही नहीं इसे धूम्रपान करने वालों में निकोटीन के प्रभाव को कम करने वाले पदार्थ के तौर पर भी देखा गया है। उटी ाqस्थत ‘डोड्डाबेट्टा टी पैâक्ट्री’ एवं ‘टी म्युजियम’ के महाप्रबंधक एल वरदराज का कहना है कि जर्मनी के कुछ हिस्सों में तो लोग अपनी सुस्ती दूर करने हेतु कुछ उसी तरह से चाय की सपेâद पत्तियों को चबाते हैं जैसे कि भारत में लोग ‘पान मसाला’ चबाकर करते हैं। वरदराज की पैâक्ट्री यूरोपीय देशों के कुछ हिस्सों में सपेâद चाय का निर्यात करती है। उन्होंने कहा, ‘यह वाकई में बहुत दिलचस्प है कि लोग वहां (जर्मनी में) तरोताजा महसूस करने के लिए सपेâद चाय को पान मसाले की तरह लेना पसंद करते हैं।’ चाय उद्योग में सपेâद चाय सभी चाय की किस्मों में महगी होती है। इनकी पत्तियों को हाथों से तोड़ा जाता है और निर्यात से पहले इन्हें धूप में सुखाया जाता है। उन्होंने कहा कि अन्य किस्मों से इतर सपेâद पत्तियां अप्रसंस्कृत होती हैं और इसीलिए उनमें अधिक मात्रा में एंटी ऑक्सीडेंट मौजूद होता है। यहां तक कि सेहत के लिहाज से भी इसे ग्रीन टी से ज्यादा फायदेमंद माना जाता है। वरदराज ने बताया, ‘सपेâद चाय का निर्माण चाय की पत्तियों से नहीं, वाqल्क इसकी कोपलों से होता है। उपभोक्ता इसे मुंह में चबाते हैं और धूम्रपान करने वालों के बीच इसे निकोटीन की विषाक्तता कम करने के तौर पर भी जाना जाता है।