अनपढ़ है पूरा गांव


चंडीगढ़। हरियाणा में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए स्वूâली शिक्षा का नियम लागू होने से पंचायत चुनाव में एक बड़ी परेशानी उत्पन्न हो गई। इस नियम की वजह से पहले चरण में ५८७ सीटें खाली ही रहने वाली हैं क्यूंकि इन पर कोई भी उम्मीदवार चुनाव ही नहीं लड़ रहा। जींद जिले में पंचों की सबसे ज्यादा ७४ सीट खाली हैं। जबकि मेवात में ६३ सीटें। दूसरे जिलों में ५० से कम सीटें खाली हैं। खबरों के मुताबिक हरियाणा के २१ जिलों में से एक भी ऐसा नहीं है, जहां सभी सीटों पर उम्मीदवार पूरे हो गए हों। करनाल में सबसे कम दो और महेंद्रगढ़ में तीन सीट खाली हैं। पहले चरण का चुनाव १० जनवरी को होने जा रहा है। इसके लिए कुल १.०२ लाख उम्मीदवारों ने नामांकन भरा है। इनमें से ३३,०४६ के नामांकन रद्द कर दिए गए हैं।
हरियाणा सरकार ने बीते वर्ष अगस्त में पंचायती राज कानून में संशोधन कर दिया था। अब राज्य में पंचायत चुनाव लड़ने के लिए सामान्य वर्ग के उम्मीदवार का १०वीं उत्तीर्ण होना अनिवार्य है। अनुसूचित जाति के लोगों के लिए यह योग्यता ८वीं पास है। वहीं, अनुसूचित जाति की महिला प्रत्याशी को पंच का चुनाव लड़ने के लिए कम से कम ५वीं पास होना आवश्यक है। साथ ही प्रत्याशी के घर में शौचालय होना भी जरूरी है। २०११ की जनगणना के मुताबिक हरियाणा की ग्रामीण आबादी ९६ लाख है। इस नियम के आqस्तत्व में आने के तुरंत बाद ही ६८ फीसदी अनुसूचित महिलाएं और ४१ फीसदी अनुसूचित जाति के पुरुष पंचायत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य हो गए थे। जो ४८ फीसदी योग्य थे, उनमें भी महिलाओं की संख्या १५.३७ लाख ही है। सूत्रों का कहना है कि अब सरकार खाली सीटों का समाधान तलाशने में जुटी है।