सात स्थानों में जल पर्यटन विकसित करेगी वेंâद्र सरकार


नई दिल्ली। नरेंद्र मोदी की सरकार तटीय नौ परिवहन के माध्यम से कम से कम सात धार्मिक स्थानों पर समुद्री पर्यटन एवं कार्गों (माल) के आदान-प्रदान को बढ़ावा देगी। प्रधानमंत्री के सुझाव के बाद जहाजरानी मंत्रालय द्वारा व्यापक योजना तैयार की गयी है। व्रूâज पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित करने के लिए इलाहाबाद, वाराणसी, पटना, भागलपुर, कोलकाता, गुहावाटी एवं तेजपुर की पहचान की गयी है तथा स्थलों तक जलमार्गों एवं व्रूâज के माध्यम से पहुंच सुनिश्चित की जाएगी। व्रूâज पर्यटन की संभावना के मद्देनजर रिपोर्ट में बताया गया कि औसतन ५०० से ७०० भारतीय पर्यटक सिंगापुर से व्रूâज पैरासेलिंग के लिए गये थे क्योंकि वहां पर ऐसी सुविधा उपलब्ध नहीं थी। रिपोर्ट में इस बात पर भी जोर दिया गया कि रेल एवं सड़क यातायात की अपेक्षा सस्ता होने के बावजूद भी जल परिवहन को नजरअंदाज किया गया है। पांचवीं पंचवर्षीय से ११वीं पंचवर्षीय योजना तक पुरे परिवहन सेक्टर पर ७.३२लाख रूपये खर्च किए गए थे जिसमें से रेलवे पर कुल खर्च लगभग ३.७७ लाख करोड़ रूपये जबकि सड़क एवं हाइवे पर २.३८ लाख करोड़ एवं यहां तक कि नागरिक विमानन परिवहन पर खर्च लगभग ६९ हजार २९० करोड़ रूपयें था। जलमार्ग से परिवहन का खर्च लगभग ४७३९१ करोड़ रूपये था जो क कुल खर्च का लगभग ६.५ फीसदी है। भारत का कुल समुद्री तटीयक्षेत्र ७५१७ किलोमीटर है एवं तटीय जहाजरानी से लगभग दो करोड़ मिलियन टन सामान की ढुलाई तथा अदान-प्रदान किया जाता है।