सूरत अग्निकांड : सबक ले कर फायर सेफ्टी के ये साधन जुटाये जाने चाहिये


प्रतिकात्मक तस्वीर। (PC : slidetosafety.com)

महापालिका फायर ब्रिगेड को आधुनिक साधनों से सुसज्ज करें, बहुमंजिला इमारतें और टेक्सटाईल मार्केटों में भी इन्हें स्थापित करना अनिवार्य किया जाए

सूरत के सरथाना चूंगी नाके के पास तक्षशिला आर्केड में लगी भीषण आग और उसमें मारे गये २३ मासूम बच्चों की ह्दय विदारक घटना के बाद समाज में कई प्रकार की चर्चाएं हो रही हैं। शहर में शैक्षणिक संस्था में घटित यह कोई पहला हादसा नहीं है। इससे पहले वेसू के एक टयूशन क्लास में भी आग की वारदात हुई थी और उस वक्त भी देखा गया था कि दमकल विभाग के पास लोगों की जान बचाने के लिये उपयोग में लाये जा सकें ऐसे आधुनिक साधनों का अभाव था। शुक्रवार की घटना के वक्त भी दमकल दस्ते मौका-ए-वारदात पर कुछ देरी से पहुंचे और जब पहुंचे तो उनके पास बचाव कार्य के लिये अनिवार्य साधन नहीं थे।

शुक्रवार की घटना के वक्त एक ओर जहां दमकल दस्ते आगे बुझाने का प्रयास कर रहे थे, जबकि दूसरी ओर उनके सामने इमारत की चौथी मंजिल पर फंसे विद्यार्थियों को सुरक्षित निकालने की चुनौती थी। लेकिन चौथी मंजिल पर पहुंच सकें ऐसी फायर-लेडर उनके पास थी ही नहीं। जब ऊपरी मं‌जिल पर फंसे बच्चों को लगा कि उनके पास बचने का अन्य कोई विकल्प नहीं है, तब उन्होंने चौथी मंजिल की खिड़की से छलांग लगानी शुरू कर दी। छलांग लगाने वाले कुल १६ लोगों में शनिवार रात तक ६ लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

 

बहु मंजिला इमारतों पर आग लगने की स्थिति में सुरक्षा के क्या-क्या विकल्प हो सकते हैं और विदेशों में किस प्रकार के साधन उपयोग में लिये जाते हैं, इससे संबंधित वीडियो लोग सोशल मीडिया पर शेयर कर रहे हैं। यहां आप भी नजर करें कुछ ऐसे ही उपलब्ध उपायों पर।

 

सूरत प्रशासन को भी चाहिये कि वह सूरत के हर जोन में इस प्रकार की सुविधाएं खड़ी करें और नई इमारतों के प्लान पास करते समय पहले से इनमें से जो कोई सुविधा बिल्डर द्वारा सुलभ कराई जा सके, वह अनिवार्य बना दे। पुरानी इमारतों में भी इस प्रकार की सुविधाएं स्थापित की जा सकती हैं तो उसे भी लागू करना चाहिये। विशेष रुप से सूरत के मॉल्स, स्कूलों, शोपिंग कोम्पलेक्स और टेक्सटाईल मार्केटों में इस प्रकार की फायर सेफ्टी के उपाय बेहद जरूरी हैं, इन्हें अनिवार्य किया जाए। फायर सेफ्टी की सुविधाएं ऐसी हों कि आपात स्थिति में घटना स्थल पर मौजूद व्यक्ति ही ऐसे साधनों को ऑपरेट करके बचाव कार्य शुरू कर दे और लोगों को फायर ब्रिगेड का इंतजार ही न करना पड़े।