सूरत अग्नीकांड के पश्चात बच्चों और अभिभावकों ने अनोखे रूप से किया विरोध


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सूरत आधारित अग्निकांड पर पूरे गुजरात में प्रतिक्रियाएं देखी जा रही है। एक ओर, सूरत के लोगों में तंत्र के गेरजिम्मेदाराना कार्य प्रणाली के खिलाफ गुस्सा है। दूसरी ओर, 23 बच्चों की मौत का दुख है। अब जो बच्चे ट्यूशन क्लास जाते हैं, उनके माता-पिता और बच्चे कलेक्टर कार्यालय पर एक अनोखे तरीके से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छोटे बच्चों ने अपनी पेंट की हुई पेंटिंग्स को निकाला और कलेक्टर कार्यालय के बाहर बैठ गए। उनके माता-पिता न्याय मांग रहे हैं। बच्चों ने अपने हाथों में अग्नीकांड की तस्वीरें लिए अपना आक्रोश व्यक्त कर रहे हैं।

जिन लोगों ने आवेदन दिया था, उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा कि सूरत में ऐसी घटनाएं कई बार हो रही थीं। नागरिकों पर, सरकारी तंत्र द्वारा, सरकारी कर्मचारीयों द्वारा एक तरह का गंभीर अन्याय हो रहा है, सूरत के अंदर वराछा से लेकर कामरेज तक एक बड़ा क्षेत्र, एक बड़ी आबादी, और एक ही फायर ब्रिगेड, सीढ़ियों का अभाव। यह तंत्र केवल माहौल को शांत करने के लिए अधिकारियों को निलंबित करती है। अधिकारीयों को इसके लिए स्थायी रूप से निलंबित किया जाता है। इसके अंदर जो आरोपी हैं, उन्हें जेल की सलाखों के पीछे भेजा जाना चाहिए। कई स्कूलों में, कई ट्यूशन क्लासेस में छत पर एक डोम बनाकर एक कमरा बनाते हैं और पीआई के लिए व्यवस्था बता कर एक क्लास बनाते हैं, बच्चों के भविष्य के साथ समझौता ना हो इसके लिए सख्त से सख्त नियम कदम उठाए जाएं ऐसी विनती है।

इस घटना के पश्चात इतना भय लगता है कि जब हम क्लासिस में जाते हैं, तो ऐसा कुछ हो सकता है। मुख्य समस्या GEB की है। जब आग लगी  तो जीईबी ने बिजली काट दी होती, इतनी बड़ी आपदा नहीं आती।