सूरत अग्निकांड : मुख्य सचिव मुकेश पुरी की रिपोर्ट में चौंकाने वाले खुलासे


सूरत अग्निकांड - मौका ए वारदा का मुआयना करते मुख्य सचिव मुकेश पुरी (PC : telegraphindia.com)
  • चौथी मंजिल से निकलने का वो मार्ग बंद न होता तो बच जातीं कई जानें!!
  • इतने बड़े महानगर में हाईड्रोलिक लिफ्ट केवल दो, वो भी वराछा से काफी दूर, घटना स्थल पर पहुंचे तब तक दुःखांतिका घट चुकी थी!

विगत शुक्रवार सूरत के सरथाना क्षेत्र में जो अग्निकांड हुआ उसकी जांच रिपोर्ट तीन दिनों में देने की सूचना मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने सचिव मुकेश पुरी को दी थी। सोमवार को मुकेश पूरी ने एक पत्रकार परिषद को संबोधित कर अपनी जांच‌ रिपोर्ट के मुख्य बिंदू सार्वजनिक किये।

मुख्य सचिव मुकेश पुरी की रिपोर्ट के मुख्य बिंदू

रिपोर्ट में कहा गया है कि पहले और दूसरे माले के एयर कंडीशन्ड बोर्ड में शोर्ट सर्किट से आग लगी और वह तीसरी मंजिल पर पहुंच गई। आग अधिक फैलने का अन्य कारण वहां पर मौजूद फ्लेक्स बैनर और चोथी मंजिल की छत पर बना डोम व वहां विद्यार्थियों के बैठने के लिये रखे गये टायर थे। टायरों के आग की चपेट में आने से धूंआ भी अधिक हुआ और आग भी फैली।

चौथा माला गैरकानूनी था

रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला तथ्य यह नजर पड़ता है कि इमारत की तीन मंजिलों के निर्माण के एवज में स्टेम्प ड्यूटी भरी गई थी लेकिन कहीं भी चौथी मंजिल का जिक्र नहीं था। ऐसे में कहा जा सकता है कि चौथा माला गैरकानूनी था। वहीं चौथी मंजिल से तीसरी मंजिल पर पहुंचने के एक मार्ग बनाया गया था जहां आग नहीं लगी थी। लेकिन उस मार्ग को लकड़ी के पाटों और किलों से बंद कर दिया गया था। यह एक गंभीर भूल थी। यदि वह मार्ग खुला होता तो शायद विद्यार्थियों की जानें बच जातीं। चौथे माले के अवैध निर्माणकार्य का सर्वे नहीं किये जाने के चलते अधिकारी को निलंबित कर दिया गया है।

दमकल दस्ता समय पर पहुंचा, लेकिन हाईड्रोलिक फायर गाड़ी का अभाव

रिपोर्ट में सूरत के दमकल विभाग का बचाव किया हुआ नजर आता है। कहा गया है कि दमकल दस्ता सूचना मिलने के छः मिनटों में रवाना हो चुका था, समय पर राहत एवं बचाव का कार्य शुरू हो गया था। लेकिन आग बड़ी होने के कारण अतिरिक्त गाड़ियां मंगवाई गईं। रिपोर्ट में इस बात का भी स्वीकार किया गया है कि दमकल विभाग के पास दो हाईड्रोलिक फायर फाईटर हैं जिसके आने में ४० से ४५ मिनट का समय लगा। जब तक यह वाहन घटना स्थल पर पहुंचा तब तक काफी देर हो चुकी थी। सूरत शहर की अधिकांश फायर गाड़ियों में दो या तीन मंजिल तक पहुंचा जा सके इतनी ही सीढ़ियां हैं। हाइड्रोलिक फायर गाड़ी सूरत में केवल दो हैं और वह भी घटना वाले दिन शहर के खूब दूर के स्टेशनों पर तैनात थीं।

भविष्य के लिये होंगी तैयारी

भविष्य में इस प्रकार की घटनाएं न हों इसके लिये सचिव मुकेश पूरी ने कहा है कि शहर के ऐसी इमारतों और जगहों की सूची तैयार की जा रही है जहां इस प्रकार के हादसों का खतरा हो, जहां लोगों की आवाजाही अधिक हो। ऐसी जगहों पर पर्याप्त मात्रा में फायर सेफ्टी के साधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जायेगी और साथ ही ऐसे हादसों के वक्त लोगों को क्या करना चाहिये ‌इसके लिये जागरूकता अभियान छेड़ा जायेगा।

आवश्यक पोलिसी बनाई जा रही

इतना नहीं नहीं फ्लेक्स बैनर, ओपन ट्रांसफोर्मरों के मुद्दों पर एक पोलिसी बनाई जायेगी। कुछ लोग पावर लोड के अतिरिक्त बिजली का प्रयोग करते हैं इससे भी आग की घटनाएं बढ़ रही हैं, इसके लिये भी उचित पोलिसी बनाई जायेगी। मुकेश पुरी ने यह भी स्वीकार किया कि फायर विभाग के स्टाफ की भी कमी है उसे दुरस्त किया जायेगा। ऊंची इमारतों में आग लगने की स्थिति में क्या कदम उठाये जाएं और वैसी परिस्थिति में हाईड्रोलिक फायर सेफ्टी के क्या उपाया हों तथा जोन के अनुसार उनकी तैनाती हो इस पर विचार किया जायेगा।