नवरात्रि में प्रसाद के रूप में पड़ते हैं कोड़े!


(PC : divyabhaskar.com)

सूरत में वाडी फलिया स्थित गोरबाई माता मंदिर की अनोखी प्रथा

सूरत के वाडी फलिया क्षेत्र के छीपवाड़ इलाके में गोरबाई माता के मंदिर में नवरात्रि के अवसर पर भक्तों द्वारा माताजी के प्रसाद व आशीर्वाद रूप कोड़े खाने की प्रथा प्रचलन में है।

यूं तो नवरा‌त्रि के नर्व के दौरान लोग उपवास रखते हैं, गरबा घूमते हैं, माता की आराधना करते हैं, मौनव्रत रखते हैं। लेकिन सूरत के इस इलाके में लोग दो सदियों से इस अनोखी प्रथा को अपनाये हुए हैं। बड़ी संख्या में भक्तजन यहां नवरात्रि के सातम और आठम के दिन आकर इन कोडों रूपी प्रसाद को पाकर खुद को धन्य समझते हैं। बता दें कि एक मोटे से रस्से से भक्तों को कोड़े मारने का कार्य एक विशेष परिवार के सदस्य पारंपरिक रूप से करते आ रहे हैं। ये कोड़ा भी खास विधि-विधान से बनाया जाता है। बाकायदा इसकी पूजा होती है। एक बार प्रयोग में लाये जाने के बाद दोबार इस कोड़े का उपयोग नहीं होता। साथ ही प्रसाद स्वरूप कोड़े मारने की ये प्रथा भी केवल नवरात्रि के दो दिन ही होती हैं। भक्त भी संख्या-विशेष की मन्नत लेकर कोड़े मरवाते हैं। कोई भक्त दो कोड़े तो कोई ग्यारह कोड़े तक की मन्नत रखता है और उसे उसी के अनुरूप कोड़े मारे जाते हैं। जिस भक्त को कोड़े मारे जाते हैं उसे पहले मंदिर की ओर से विशेष टोपी पहनाई जाती है और उसके बाद ही कोड़े मारने की प्रक्रिया शुरू की जाती है। पूरे साल फिर कभी ऐसा दृश्य देखने को नहीं मिलता।

साथ ही गोरबाई माता मंदिर में माताजी के खंड भरे जाते हैं। विशेष रूप से निसंतान महिलाएं संतान प्राप्ति की मन्नत मानकर यहां खंड भरती हैं और ऐसा करने से उन्हें संतान सुख मिलने की मान्यता वर्षों से चली आ रही है।

इस गोरबाई माताजी के मंदिर में क्षेत्र के मूल सूरती यानि मोढ वणिक और खत्री समाज के लोगों की विशेष श्रद्धा है। इस समुदाय के लोग अपने जीवन की मुश्किलों, संकटों के संबंध में मन्नते रखते हैं और ऐसा माना जाता है कि इस माताजी के मंदिर में रखी गई मन्नत अवश्‍य पूरी होती है।