शीला की जिद से दिल्ली में फायदे में रही कांग्रेस!


(PC : asianage.com)

नई दिल्ली(ईएमएस)। दिल्ली में भारतीय जनता पार्टी के सभी प्रत्याशियों ने सातों सीटों पर विशाल जीत हासिल की है। जीत का अंतर इतना अधिक है कि कांग्रेस और आम आदमी पार्टी के वोटों को जोड़ दिया जाए तो भी भाजपा आगे है।

किंतु भारतीय जनता पार्टी की इस धमाकेदार जीत के बावजूद दिल्ली में कांग्रेस के लिए कुछ ऐसा है जो आशा की किरण जगाता है। दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष शीला दीक्षित प्रारंभ से ही आम आदमी पार्टी से गठबंधन करने के खिलाफ रही हैं। शीला कि यह जिद चुनावी परिणामों से पुष्ट होती नजर आ रही है। भारतीय जनता पार्टी को दिल्ली में 56.6% वोट मिले हैं जो कि आम आदमी पार्टी के 18.11 प्रतिशत और कांग्रेस के 22.51 प्रतिशत वोटों के योग से कहीं अधिक हैं।

मत प्रतिशत के हिसाब से दूसरे नंबर पर आई कांग्रेस

इसलिए यह तो तय है कि आम आदमी पार्टी से गठबंधन करने पर भी कांग्रेस को कोई लाभ नहीं होता। लेकिन इस बुरी पराजय का एक अच्छा पहलू यह है कि दिल्ली में कांग्रेस दूसरे नंबर पर आ गई है। कांग्रेस को दिल्ली में 22.51 प्रतिशत वोट मिले हैं जो कि आम आदमी के 18.11 प्रतिशत से लगभग 4% अधिक हैं। इससे दिल्ली में कांग्रेस के पुनर्जीवित होने की संभावना को बल मिला है। बीते विधानसभा चुनाव में कांग्रेस अधिकांश स्थानों पर तीसरे नंबर पर पहुंच गई थी और बहुत से स्थानों पर चौथे नंबर पर भी रही थी। मत प्रतिशत में भी वह तीसरे नंबर पर थी। लेकिन अब कांग्रेस का दूसरे नंबर पर आना शीला दीक्षित के लिए राहत भरा हो सकता है।

अभी विधानसभा चुनाव हुए को एडवान्टेज भाजपा

आगामी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के वोटों में यह बढ़त फायदा पहुंचाएगी। मौजूदा परिदृश्य को देखें तो आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा की सरकार बनती नजर आ रही है। लेकिन इस परिदृश्य में कुछ परिवर्तन हुआ और कांग्रेस का वोट प्रतिशत बढ़ा तो कांग्रेस आम आदमी पार्टी को पीछे छोड़ सकती है। जिस तरह की जीत लोकसभा चुनाव में भाजपा को मिली है उसके चलते यह संभावना जताई जा रही है कि आगामी सरकार भाजपा की ही होगी। इसलिए दिल्ली में अब दूसरे स्थान के लिए भी मुकाबला होगा जिसमें कांग्रेस लाभ में रह सकती है। देखना यह है कि क्या आगामी विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस और आम आदमी पार्टी एक साथ आएंगी।

टेंशन में केजरीवाल, 70 में से 65 विधानसभा सीटों पर भाजपा का दबदबा

दिल्ली की सातों सीटों पर भाजपा का कब्जा रहा है और 2015 विधानसभा में 70 में से 67 सीट जीतकर सत्ता में आनेवाली आम आदमी पार्टी तीसरे नंबर पर रही। आम आदमी पार्टी के उम्मीदवार सात सीटों में से सिर्फ दो पर ही दूसरे स्थान पर रहे जबकि एक सीट पर अपनी जमानत भी जब्त करवा बैठे। दिल्ली विधानसभा के हिसाब से बात करे तो 70 में से 65 सीटें ऐसी रहीं जहां भाजपा का दबदबा देखने को मिला वहीं पांच सीटों पर कांग्रेस आगे रही। यह पांच सीट मुस्लिम बहुल इलाका है।

लोकसभा चुनाव के यह परिणाम इस कारण भी जरुरी हैं, क्योंकि 2020 में दिल्ली में विधानसभा के चुनाव होने वाले हैं। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के विधानसभा क्षेत्र में इनकी पार्टी तीसरे नंबर पर रही। आप के बड़े नेता कैलाश गहलोत, राजेंद्र पाल गौतम, गोपाल राय, इमरान हुसैन और सौरभ भारद्वाज के भी विधानसभा क्षेत्र में उनकी पार्टी तीसरे नंबर पर रही वहीं मनीष सिषोदिया, सतयेंद्र जैन और राखी बिड़ला के क्षेत्र में आप दूसरे नंबर पर रही।

वहीं चुनाव से पूर्व कांग्रेस के साथ गठबंधन के लिए केजरीवाल ने तमाम कोशिशें कीं, वह सफल भी रहता तब भी दिल्ली में भाजपा की सेहत को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकता था। वोट शेयर की बात करें तो लोकसभा चुनाव में भाजपा को 56.6 फीसदी, कांग्रेस को 22.5 फीसदी और आप को 18.1 फीसदी वोट मिला। इस करारी हार के बाद केजरीवाल गुट की बेचैनी बढ़ी हुई है, क्योंकि अगले साल पार्टी को विधानसभा चुनाव में जाना है। केजरीवाल ने किसी भी संभावित गठबंधन से इनकार करते हुए हार के समीक्षा की बात कही। गोपाल राय ने कहा कि भले ही लोगों ने केंद्र के लिए मोदी को पसंद किया है, पर दिल्ली में केजरीवाल का कोई विकल्प नहीं है। उन्होंने कहा कि दिल्ली के लोग आप को एक मॉडल पार्टी के रूप में देखते हैं और हम आगे की रणनीति बनाने में लगे हुए हैं।