1984 के सिक्ख दंगों पर अपने बयान पर साम पित्रोदा को देना पड़ा स्पष्टीकरण; कहा – भाजपा बयान को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही


(PC : mangalorean.com)

लोकसभा चुनाव 2019 में कांग्रेस की ओर से एक नेता बड़ी सक्रियता से बयान दे रहे हैं, और वे हैं इंडियन ओवरसिस कांग्रेस के प्रमुख साम पित्रोदा। यूं तो साम के बयान में तथ्यात्मक रूप से कुछ गलत नहीं होता, लेकिन चुंकि एक मंझे हुए राजनेता न होने के कारण उनके बयानों पर बार-बार बवाल हो जाता है। और जब बयान को लेकर विवाद हो जाता है, तो साम को फिर से मीडिया में आकर अपने ही बयान का स्पष्टीकरण देना पड़ता है। पूर्व में मणीशंकर एय्यर और दिग्वजिय सिंह के साथ भी ऐसा ही होता था। दूसरे शब्दों में कहें तो कांग्रेस के विरोधी और खास कर भाजपा इन नेताओं के बयानों पर विशेष रूप से टार्गेट करते हैं।

गुरुवार को साम पित्रोदा ने मीडिया को दिये अपने इंटर्व्यू में भाजपा के नानावटी कमिशन रिपोर्ट के हवाले से किये गये उस दावे पर प्रतिक्रिया दी थी जिसमें कहा गया था कि १९८४ में पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के कार्यालय के निर्देश पर ही सिक्खों की ‘हत्या’ की गई थी। भाजपा के इस दावे पर साम पित्रोदा ने कहा था कि यदि १९८४ में दंगे हुए तो क्या हुआ?

 

साम के इस बयान पर जब विवाद पनपता दिखा तो उन्हें पुनः स्पष्टीकरण देना पड़ा कि भाजपा उनके शब्दों को तोड़ मरोड़कर पेश कर रही है और अपनी असफलता को छुपाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि सिक्ख भाई-बहनों के दर्द को वे समझते हैं और जो ज्यादतियां हुईं उसका उन्हें दुःख भी है। लेकिन ये भूतकाल की घटना है जिसका वर्तमान चुनाव में कोई औचित्य नहीं है। यह चुनाव मोदी सरकार के पांच साल के कामकाज पर केंद्रित है।

मीडिया से बातचीत में पित्रोदा ने कहा कि राजीव गांधी और राहुल गांधी जाति-धर्म के आधार पर कभी किसी वर्ग को टार्गेट नहीं करेंगे। भाजपा इस प्रकार का झूठ फैला रही है क्योंकि उसके पास सरकार के पांच सालके प्रदर्शन को लेकर जनता के समक्ष कहने को कुछ नहीं है।