रामजन्मभूमि-बाबरी भूमि विवाद : मध्यस्थता की पहल कहां तक पहुंची ये आज जांचेगी सुप्रीम कोर्ट


नई दिल्ली (ईएमएस)। अयोध्या रामजन्मभूमि-बाबरी भूमि विवाद पर सुप्रीम कोर्ट की संविधान पीठ आज सुनवाई करेगी। जस्टिस खलीफुल्ला कमेटी ने मध्यस्थता को लेकर अपनी रिपोर्ट दाखिल कर दी है। प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई, जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस अब्दुल नजीर की पीठ मामले की सुनवाई करेगी। अदालत इस बात की जांच करेगा कि मध्यस्था की जो पहल की गई वह कहां तक पहुंची है।

ज्ञात रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने 8 मार्च को अपने फैसले में मामले में मध्‍यस्थता को मंजूरी दे दी थी और तीन मध्यस्थों की नियुक्ति भी की थी। इन मध्यस्थों में जस्टिस कलीफुल्ला, वकील श्रीराम पंचू और आध्यात्मिक गुरु श्री-श्री रविशंकर शामिल हैं। मध्यस्थता कमेटी ने 13 मार्च से सभी पक्षों को सुनना शुरू किया था।

इससे पहले 9 अप्रैल को रामजन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद में एक और याचिका दाखिल की गई थी। निर्मोही अखाड़ा ने सुप्रीम कोर्ट में नई याचिका दाखिल की थी और इस याचिका में केंद्र सरकार की अयोध्या में अधिग्रहीत की गई अतिरिक्त जमीन को वापस देने की अर्जी का विरोध किया गया था। अखाड़ा ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को पहले भूमि विवाद का फैसला करना चाहिए। केंद्र के जमीन अधिग्रहण करने से अखाड़ा द्वारा संचालित कई मंदिर नष्ट हो गए। ऐसे में केंद्र को ये जमीन किसी को भी वापस करने के लिए नहीं दी जा सकती। अखाड़ा ने ये भी कहा था कि रामजन्मभूमि न्यास को अयोध्या में बहुमत की जमीन नहीं दी जा सकती। अखाड़ा ने ये याचिका केंद्र सरकार की जनवरी की याचिका पर दाखिल की थी जिसमें सुप्रीम कोर्ट से मांग की गई थी कि वो विवादित भूमि के अलावा अधिग्रहीत की गई जमीन को वापस लौटाना चाहता है।