राहुल की चाईनिज रणनीति : नरेन्द्र मोदी मुझे हरा ही नहीं सकते, क्योंकि मेरी लड़ाई उनसे है ही नहीं!


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चाईनिज़ फिलोसोफर लाओ त्सु कहते थे कि कोई भी मेरा अपमान नहीं कर सकता क्योंकि मैं सम्मान नहीं चाहता। मुझे कोई हरा नहीं सकता क्योंकि मैंने जीतने का विचार छोड़ दिया है। आप मुझे कैसे हरा सकते हो? आप ऐसी व्यक्ति को ही हरा सकते हो जिसे जीतने की तमन्ना हो।

स्वर्गीय पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी के ऊपर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा महाभ्रष्ट होने के आरोप के साथ किये गये हमले के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी आक्रामक मूड में हैं। वे विभ्न्नि चैनलों को साक्षात्कार दे रहे हैं। इन साक्षात्कारों में उनकी रणनीति में बदलाव देखा जा सकता है। राजीव गांधी पर मोदी के हमले के बाद राहुल ने एक ट्वीट भी किया था कि गेज इज़ ओवर। राहुल गांधी को जब प्रधानमंत्री मोदी के विषय में सवाल पूछे जाते हैं तो वे कहते हैं मोदी के सामने चुनाव लड़ ही नहीं रहे। वे तो गरीबी, बेरोजगारी, किसानों की समस्या दूर करने के लिये चुनाव लड़ रहे हैं। मोदी से उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। राहुल गांधी ने न्यूज २४ चैनल को दिये अपने इंटव्र्यू में कहा कि नरेन्द्र मोदी भले उन पर प्रहार करते रहें, लेकिन वे कोई प्रतिक्रिया नहीं देंगे। वे मोदी को प्रेम करते रहेंगे। मोदी की शाब्दिक हिंसा का उत्तर वे प्यार से देंगे।

इस प्रकार के उत्तरों का सार यह निकलता है कि अब राहुल गांधी मोदी की ट्रेप में फंसने को तैयार नहीं हैं। भूतकाल में कांग्रेस को हमेशा मोदी के बारे में खराब भाषा का प्रयोग करने से नुकसान उठाना पड़ा है। चायवाला, मौत का सौदागार, नीच जैसे शब्दप्रयोग मोदी के लिये किये गये और उसका लाभ उलटा मोदी को ही हुआ। ऐसे में अब राहुल गांधी अपनी ऐसी छवि बनाना चाहते हैं कि मोदी उन पर सतत प्रहार करते हैं परंतु उससे उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता। वे कभी भी उत्तेजित नहीं होंगे। मोदी के विषय में वे अनुचित भाषा का प्रयोग नहीं करेंगे। क्योंकि अब वो मोदी के खिलाफ लड़ ही नहीं रहे हैं। यानि मोदी उनको हरा ही नहीं सकते। वे तो गरीबी, बेरोजगारी के खिलाफ लड़ रहे हैं। इस प्रकार, राहुल ने चाईनिज़ फिलोसोफर लाओ स्तु की सोच अपनाई हो ऐसा लगता है। दूसरी बात यह कि मीडिया में ऐसी चर्चा चल रही थी कि इस बार लड़ाई मोदी वर्सिस ऑल की है। राहुल गांधी को इसमें कहीं महत्व नहीं दिया गया था। इसी बात के तोड़ के रूप में राहुल ने नया राग शुरू किया है कि वे तो मोदी के खिलाफ लड़ ही नहीं रहे।

कौन थे लाओ त्सु

चीन के जाओ नामक पंथ के पर्वतक लाओ त्सु ईसा पूर्व ६०० में चीन में हुए। चीन में बड़ी संख्या में उनके फोलोअर्स हैं। उनकी फिलोसोफी दुनिया से उलट है। वे कहते हैं कि जब आप कमजोर हों तो ऐसा दर्शायें कि आप शक्तिशाली हैं और यदि आप शक्तिशाली हैं तो ऐसे पेश आएं जैसे आप कमजोर है। जीत और हार के विषय में भी लाओ त्सु कहते हैं कि यदि आपको जीतने की इच्छा न हो तो आपको कोई हरा नहीं सकता। एक प्रकार से गीता का ज्ञान भी यही कहता है कि फल की इच्छा रखे बगैर कर्म करते रहो। भगवान कृष्‍ण ने अर्जुन को कुछ ऐसा ही उपदेश दिया था। यदि कर्म की इच्छा के बगैर युद्ध करेंगे तो कल्याण ही होगा।