विपक्ष की कसौटी पर खरा उतरी EVM और VVPAT, इतना % हुआ मिलान


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ईवीएम की विश्वसनीयता के संबंध में उठाए गए सवाल चुनाव परिणामों के बाद बिल्कुल झूठ साबित हुए हैं। चुनाव आयोग के अनुसार, ईवीएम और वीवीपीएटी पर्ची का मिलान 100 प्रतिशत सही साबित हुआ। सभी राज्यों के चुनाव अधिकारियों के अनुसार, 20,625 वीवीपीएटी से एक भी मशीन के आंकड़ों में बदलाव आए ऐसा नहीं है। जितने भी ईवीएम मशीनों में वोट पड़े उतने में वीवीपीएट की पर्चियां मिली हैं।

8 अप्रैल को, सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया था कि चुनाव आयोग को कम से कम पांच पोलिंग बूथों पर EVM और VVPAT स्लिप का मिलान करना होगा। ईवीएम में डाले गए वोटों की उचित जानकारी और रिकॉर्ड के लिए वीवीपीएटी की सुविधा वर्ष 2013-14 में बनाई गई थी। ईवीएम में छेड़छाड़ होने की संभावना के मद्देनजर, चेन्नई में एक एनजीओ ने 100% ईवीएम और वीवीपीएटी पर्ची को मिलाने के लिए आवेदन किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया।

लोकसभा चुनाव के नतीजों से पहले, 21 विपक्षी दलों ने मांग की कि ईवीएम और वीवीपीएटी पर्चियों का मिलान किया जाए। हालांकि, आयोग ने इस तथ्य को खारिज कर दिया। विपक्षी ताकतें मांग कर रही थीं कि अगर कोई वीवीपीएटी पर्ची मतदान केंद्र पर मेल नहीं खाती है, तो संबंधित विधानसभा क्षेत्रों में सभी पर्ची पर विचार किया जाना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग दोनों ने विपक्ष की इस मांग को खारिज कर दिया। टीडीपी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में, 21 राष्ट्रीय और क्षेत्रीय दलों ने ईवीएम मुद्दे पर लड़ाई लड़ी।