295 स्थानों से टूटी नर्मदा नहर, पानी हो रहा है बरबाद


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नर्मदा नहर टूटने के कारण बड़ी मात्रा में पानी बह रहा है। 2001 से 2019 तक नर्मदा नहर 800 स्थानों से टूट गई है। जिसमें सबसे अधिक 2014-15 से 2018 तक 295 स्थानों पर 12 जिलों में नर्मदा नहर टूट गई थी। वर्ष 2019 में नहर टूटने की काफी घटनाएं सामने आई हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि नहरों को बनाने में व्यापक भ्रष्टाचार होने के कारण नहरें टूट गईं और पानी बर्बाद हो रहा है।

वर्ष 2013 से 2017 तक, नर्मदा परियोजना में 19,370 करोड़ रुपये की लागत हुई है। वर्ष 2013-14 से 2018-19 में नहरों के निर्माण की लागत 21,964 करोड़ रुपये थी। इसके बाद भी शाखा नहर का काम 117 किमी, विशाखा नहर का काम 258 किमी, प्रशाखा नहर का काम 1976 किमी, और प्रप्रशाखा नहर का काम 9412 किमी बाकी है।

कांग्रेस पार्टी के उपाध्यक्ष शैलेश परमार ने कहा, “2014-15 से 2018 तक 295 स्थानों पर 12 जिलों में नर्मदा नहर के टूटने के लिए व्यापक भ्रष्टाचार जिम्मेदार है। रिश्वत लेने के आरोप में नर्मदा निगम के कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया है।

31 मार्च 2018 में पिछले पांच सालों में नर्मदा का पानी 56 हजार हेक्टेयर जा रहा था, अब यह नहीं जा रहा है। नर्मदा की सिंचाई आज 18.55 लाख हेक्टेयर में होनी चाहिए थी। लेकिन वास्तव में 2 लाख हेक्टेयर में सिंचाई नहीं होती है।

नर्मदा नहर से सौराष्ट्र के बांधों को भरना था। इससे मानसून में अतिरिक्त पानी आए इसलिए भरना था। इसके लिए 2012 का चुनाव जीतने के लिए, सौराष्ट्र में नरेंद्र मोदी ने 10 हजार करोड़ रुपये के 1263 किमी लम्बी पाइपलाइन को मंजूरी दी थी। इनमें से सिर्फ 384 कि.मी. पाइप डालने में ही स‌ितम्बर 2018 तक 10,581 करोड़ रुपये खर्च हो गया। अब यह योजना रु .20 हजार करोड़ तक पहुँच गई है। इसके बावजूद सौराष्ट्र में लोग पानी के लिए तरस रहे हैं। सिंचाई की तो बात ही नहीं है। पीने का पानी भी कम ही उपलब्ध है। इस प्रकार, सरकार ने पानी के पीछे अप्रत्याशित खर्च किए हैं। कोई मुआवजा नहीं मिला है।