शपथ ग्रहण के बाद एक्शन में मोदी सरकार


(PC : EMS)

शहीदों के बच्चों को स्कॉलरशिप, कामगारों को पेंशन

नई दिल्ली (ईएमएस)। मोदी सरकार की ताजपोशी के अगले ही दिन शुक्रवार को कैबिनेट ने दो अहम निर्णय लिए। इनमें शहीदों के बच्चों को प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना के तहत स्कॉलरशिप दिए जाने का पहला फैसला लिया गया। वहीं, मजदूर-कामगारों को 3 हजार रुपए की पेंशन दिए जाने को कैबिनेट ने मंजूरी दे दी है।

मोदी पार्ट-2 की पहली बैठक में राष्ट्रीय रक्षा कोष के तहत प्रधानमंत्री छात्रवृत्ति योजना में परिवर्तन किया गया। इसके तहत शहीद पुलिसकर्मियों के बेटे को मिलने वाली राशि को 2000 से बढ़ाकर 2500 रुपए और बेटियों को 2250 से बढ़ाकर 3000 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। यह माना जा रहा है कि इससे बच्चों की शिक्षा का बेहतर रूप दिया जा सकता है।

कामगारों को 3 हजार रुपए की पेंशन

कैबिनेट में असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले मजदूरों को 3 हजार रुपए प्रति माह पेंशन दिए जाने को मंजूरी दी गई। श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने पदभार ग्रहण करने के बाद इस प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किए है। इसके अंतर्गत फेरी लगाने वाले, रिक्शा, ठेला चलाने वाले, दिहाड़ी मजदूर, घरों में काम करने वाले 127 असंगठित क्षेत्र के कामगारों को 60 साल के बाद 3 हजार रुपए मासिक पेंशन मिल सकती है। 18 से 40 वर्ष के 15 हजार रुपए तक की मासिक आमदनी वाले असंगठित क्षेत्र के मजदूर इस योजना के पात्र हैं। इसके लिए न्यूनतम मासिक प्रीमियम 55 और अधिकतम 200 रुपए प्रतिमाह है। इसमें सरकार भी अंशदान करेगी। योजना के तहत दिसंबर तक 5 करोड़ कामगारों को इससे जोडऩे का लक्ष्य रखा गया है। अगले 5 वर्षों में 10 करोड़ कामगारों को पंजीकृत किया जाएगा।

बजट सत्र 17 से, 19 को स्पीकर का चयन

संसद का बजट सत्र 17 जून से 26 जुलाई तक रहेगा। मोदी पार्ट-2 का पहला सत्र एक महीने 9 दिन का है। 19 जून को स्पीकर का चयन होगा। वहीं, स्पीकर के चयन से पहले मोदी सरकार को प्रोटेम स्पीकर पर भी नाम तय करना होगा। इसके लिए मेनका गांधी का नाम चर्चा में है।

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45 साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी

श्रम मंत्रालय ने बेरोजगारी के आंकड़े जारी कर दिए है। मोदी सरकार ने आखिरकार यह मान लिया कि बेरोजगारी की दर 45 साल के सर्वोच्च स्तर पर है। आंकड़ों के अनुसार, 2017-18 के दौरान देश में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी रही। इसमें भी महिलाओं से ज्यादा पुरुषों में बेरोजगारी है। पुरुषों की बेरोजगारी दर 6.2, जबकि महिलाओं की 5.7 फीसदी है। हालांकि, श्रम मंत्रालय के सचिव ने कहा कि सैंपलिंग की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। इसलिए इन आंकड़ों की तुलना पुराने आंकड़ों से नहीं की जानी चाहिए।

जीडीपी 5 साल के निचले स्तर पर

केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय ने शुक्रवार को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों को जारी कर दिया है। चौथी तिमाही जनवरी से मार्च में जीडीपी दर घटकर 5.8 फीसदी तक पहुंच गई है। इसका कारण विगत 9 माह में देश में कृषि, उद्योग और उत्पादन जैसे क्षेत्रों में मंदी को माना गया है। इसके साथ ही वित्त वर्ष 2018-19 में विकास दर घटकर 6.8 फीसदी पहुंच गई, जो पिछले पांच साल में सबसे कम है। हालांकि, मार्च तिमाही में जीडीपी दर 6.5 फीसदी और वित्त वर्ष 2019 में विकास दर 7.1 फीसदी रहने का अनुमान जताया गया था। इससे पहले वित्त वर्ष 2017-18 की चौथी तिमाही में देश की जीडीपी विकास दर 7.7 फीसदी थी। वहीं, 2018-19 में देश का राजकोषीय घाटा जीडीपी का 3.4 फीसदी रहा। यह दर बजट के 3.40 प्रतिशत के संशोधित अनुमान की तुलना में कम है। आंकड़ों के आधार पर कहा जा सकता है कि 31 मार्च के आखिरी में राजकोषीय घाटा 6.45 लाख करोड़ रुपए रहा, जबकि बजट में राजकोषीय घाटे के 6.34 लाख करोड़ रुपए रहने का संशोधित पूर्वानुमान व्यक्त किया गया था। यह 3.39 फीसदी रहा है। कृषि, वानिकी और मत्स्य पालन क्षेत्र की वृद्धि दर 2018-19 में 2.9 फीसदी रही, जबकि पिछले साल यह 5 फीसदी थी। इस अवधि में खर्च 23.1 ट्रिलियन रहा, जबकि लक्ष्य 24.1 ट्रिलियन का रखा गया था।