करंसी नोट से फोटो और दुनिया से गांधी प्रतिमाएं हटाने की पैरवी करने वाली IAS अधिकारी को हुआ गलती का एहसास


(PC : Twitter/@PalgharCEO)

राष्ट्रपति महात्मा गांधी के विषय में यदि कोई कहे कि हमें करंसी नोट पर से गांधीजी का चित्र हटा देना चाहिये, दुनिया भर से उनकी सारी प्रतिमाएं और उनके नाम पर जो भी संस्थान/मार्ग हैं उनका पुनर्नामकरण करना चाहिये, यही १५०वीं जन्म जयंति पर गांधीजी को सच्ची श्रद्धाजंलि होगी, तो आपकी प्रतिक्रिया क्या होगी? अवश्य ही आपको अच्छा नहीं लगेगा, या ऐसा बयान देने वाले पर गुस्सा या तरस आयेगा।

लेकिन इस प्रकार का आपत्तिजनक बयान किसी आम नागरिक ने नहीं बल्कि महाराष्ट्र की एक आईएएस अधिकारी निधी चौधरी ने दिया। बता दें वे २०१२ बैच की आईएएस अधिकारी हैं और वर्तमान में बीएमसी में कार्यरत हैं। इससे पहले वे सहायक कलेक्टर के पद पर थीं।

विगत १७ मई को उन्होंने एक ट्ववीट किया जिसमें यही कुछ लिखा हुआ था। हालांकि उनके इस ट्वीट पर काफी बवाल मचा। एनसीपी ने तो उन्हें निलंबित तक कर देने की मांग उठा डाली। आखिरकार निधी चौधरी को अपना ट्वीट हटा देना पड़ा। लेकिन तब तक उसके ट्ववीट के स्क्रिनशॉट लिये जा चुके थे। जरा नजर करें निधी चौधरी के ट्ववीट पर।

आईएसएस अधिकारी निधि चौधरी के विवादित ट्वीट का स्क्रिनशॉट।

हालांकि उनके ट्ववीट पर विवाद बढ़ता देखा उसे हटाने के बाद निधि चौधरी ने ३१ मई को एक और ट्ववीट किया जिसमें अपनी बात को गलत ढंग से लिये जाते हुए स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने लिखा कि मैंने अपना ट्ववीट डिलीट कर दिया है क्योंकि कुछ लोगों को गलतफहमी हो गई। यदि उन्होंने मेरे पुराने ट्ववीट को देखा होगा तो उन्हें पता चल जायेगा कि वे कभी सपने में भी गांधीजी का अपमान नहीं कर सकती, मैं उनके आगे सिर झुकाती हूं और मेरी आखिरी सांस तक उनके प्रति आदर कायम रहेगा। अपने इस ताजा ट्वीट में वे गांधीजी तस्वीर के समक्ष पुष्प अर्पित करते हुए और गांधीजी की प्रतिमा के आगे खड़ी हुई भी दिख रही हैं।

 

उम्मीद करते हैं कि अपनी गलती का एहसास कर लेने वाली निधि चौधरी से जुड़ा यह मामला यहीं खत्म हो जायेगा।