लोकसभा चुनाव 2019 : क्या इस बार सट्टा बाजार को भी मात देगा एक्जिट पोल?


(PC : business-standard.com)

19 मई को लोकसभा चुनाव के सातवें और ‌आखिरी चरण का मतदान पूरा होने के साथ ही देश के प्रमुख समाचार चैनलों ने अपने-अपने पिटारे से एक्जिट पोल के नतीजे घोषित कर दिये। सभी चैनलों के नतीजों में एक ही रूझान दिख रहा था कि नरेन्द्र मोदी एक बार फिर केंद्र में एनडीए की सरकार बनाने जा रहे हैं। यदि सभी चैनलों के परिणामों का औसत निकालें तो वह भी लगभग 300 सीटों के पार जा रहा है। यानि कह सकते हैं कि एक्जिट पोल में इस बार आम राय बनी दिखती है।

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हालांकि देश के विभिन्न सट्टा बाजारों पर नजर दौड़ाएं तो पता चलता है कि वह एनडीए को बढ़त तो देते दिख रहे हैं, लेकिन 272 के बहुमत के आंकड़े से दूर बता रहे हैं। ऐसे में प्रश्न यह उठ रहा है कि क्या इस बार एक्जिट पोल देश के सट्टा बाजार को पटखनी देने जा रहे हैं? क्या एक्जिट पोल वालों के पास ऐसी कोई जानकारी है, जिसका पता सट्टेबाजों को नहीं?

आम तौर पर देखा गया है कि सट्टाबाजार चलाने वालों का अनुमान अमुमन सही बैठता है। या यूं कहिये वास्तविकता के करीब होता है। इंडिया टूडे द्वारा प्रस्तुत देश के प्रमुख सट्टा बाजार केंद्रों के आंकड़े पर नजर डालें तो राजस्थान का सट्टाबाजार भाजपा को 242-245 और कांग्रेस को 75-80 सीटें दे रहा है। मुंबई, गुजरात, दिल्ली और मध्यप्रदेश का सट्टा बाजार भी लगभग इसी के आसपास आंकड़े बता रहा है। राजस्थान का फलौदी सट्टा बाजार सबसे सटीक माना जाता है। उसके अनुमान के मुताबिक भाजपा को सरकार बनाने के लिये सहयोगियों पर आधार रखना पड़ेगा।

जानकारों का मानना है कि सट्टाबाजार कभी सही आंकड़े सार्वजनिक नहीं करेगा। सट्टा बाजार चलाने वाले अधिकांश मुनाफे में रहते हैं और वे मुनाफे में तभी रहेंगे जब सट्टा लगाने वाले आम लोगों की राय के विपरीत नतीजें हों और सटोडिये मुनाफे में रहें। यानि वे तभी कमाई करेंगे जब जो आम लोगों को दिख रहा हो उससे विपरीत परिणाम रहे। तो क्या होगा इस बार? ‌एक्जिट पोल वाले सही साबित होंगे या सट्टा बाजार वाले? २३ मई को स्पष्ट हो जायेगा।