अमेठी के अलावा वायनाड से जीत पक्की मान चुनावी मैदान में उतर रहे राहुल, क्या स्मृति भी जायेंगी पीछे-पीछे?


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कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी केरल के वायनाड लोकसभा क्षेत्र से भी चुनाव लड़ेंगे। कांग्रेस की ओर से रविवार को यह अधिकृत घोषणा की गई। ऐसे में यह पहली बार हो रहा है कि राहुल गांधी उत्तरप्रदेश की अमेठी के अलावा दूसरी सीट से भी अपना भाग्य आजमायेंगे। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता एके एंटनी ने पत्रकार परिषद में यह घोषणा की।

 

वायनाड ही क्यों?

केरल की वायनाड लोकसभा सीट को कांग्रेस एक सुरक्षित सीट मानकर चल रही है। वायंड लोकसभा सीट २००८ के सीमांकन के बाद अस्तित्व में आई है। इस संसदीय क्षेत्र में कुल ३ जिलों की सात विधानसभा सीटों का समावेश है जिनमें वायनाड जिले की ३, मल्लापुरम जिले की ३ और कोझीकोड जिले की १ विधानसभा सीट शामिल है। बता दें कि २०१४ और २०१९ में कांग्रेस के ही एमआई शानवास ने इस सीट से सीपीआई प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की थी। नवंबर २०१८ में शानवास के देहांत के बाद से यह सीट खाली है।  पिछले दो चुनावों में कांग्रेस प्रत्याशी का जीत का फासला अवश्य कम हुआ है, लेकिन कांग्रेसी थींक टैंक का मानना है कि पार्टी २०१९ के चुनाव में इस सीट को बड़ी आसानी से निकाल सकती है।

कांग्रेस के जीत के प्रति विश्वास का सबसे बड़ा कारण यहां के अधिकतम विधानसभा क्षेत्रों और विशेष रूप से मननथावडी, सुलथानबेथरी और कलपेटा में मु‌स्लिम बहुल आबादी है। वायनाड जिले में ४९ प्रतिशत हिंदू और ४९ प्रतिशत मुस्लिम मतदाता हैं। कांग्रेस इस बात को लेकर आश्वस्त है कि राहुल गांधी की स्टार वेल्यू से मतदाताओं का रुझान उनकी ओर बढ़ेगा और जीत आसान हो जायेगी।

गैर-भाजपाई खेमा नाराज

राहुल के वायनाड से लड़ने के फैसले से गैर-भाजपाई खेमे के अन्य दल नाराज भी दिख रहे हैं। वामपंथी दल और कांग्रेस के सहयोगी दल एनसीपी ने भी राहुल के यहां से लड़ने का विरोध किया है। कई वामपंथी नेता और खास कर केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने खुलेआम कहा है कि राहुल गांधी के वामपंथी उम्मीदवार के खिलाफ खड़ा होना विपक्षी एकता में दरार का संकेत जनमानस में देगा। वायनाड से एलडीएफ के प्रत्याशी हैं पीपी सुनीर। पिछले चुनाव में भाजपा यहां तीसरे नंबर पर रही थी।

क्या स्मृति ईरानी भी वायनाड जायेंगी?

देखना होगा, राहुल गांधी के चुनाव लड़ने की घोषणा के बाद भाजपा यहां किसी बड़े चेहरे को उतारकर मुकाबले को रोचक बनायेगी या चुनावी जंग कांग्रेस और वामपंथी के बीच की रह जायेगी। पिछले दिनों चर्चा थी कि यदि राहुल अमेठी के अलावा अन्य किसी सीट से चुनाव लड़ते हैं तो स्मृति ईरानी भी उनके पीछे-पीछे जायेंगी और राहुल गांधी के खिलाफ उतरेंगी।

दोनों सीटें जीते तो कौन सी सीट छोड़ेंगे राहुल?

राजनीतिक हलकों में अब इस चर्चा ने भी जोर पकड़ लिया है कि यदि राहुल गांधी अमेठी और वायनाड दोनों लोकसभा सीट से चुनाव जीतते हैं तो दोनों में से कौन सी सीट को छोड़ना पसंद करेंगे? कहा जा रहा है कि दोनों में से राहुल वायनाड को पसंद कर सकते हैं और अमेठी सीट छोड़कर वहां से उप चुनाव में प्रियंका गांधी उनकी राजनीतिक विरासत संभाल सकती हैं।