गुजरात में कांग्रेस चल सकती है तुरूप की चाल, अहमद पटेल भरुच से लड़ सकते हैं चुनाव


गुजरात के भरुच संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस दिग्गज और पार्टी कोषाध्यक्ष अहमद पटेल चुनाव लड़ सकते हैं, ऐसे संकेत मिल रहे हैं। राजनीतिक पंडितों का यह भी मानना है कि कांग्रेस में वर्तमान में पुरानी और नई पीढ़ी के नेताओं के बीच जबरदस्त खींचतान चल रही है। राहुल गांधी चाहते हैं कि पुराने दिग्गज नेता स्वयं मैदान में उतरें और अपनी ताकत साबित करें। यदि दिग्गज ऐसा कर पाते हैं तो इससे युवाओं में भी जोश आयेगा।

कहा जा रहा है कि परोक्ष रूप से राहुल गांधी जानना चाहते हैं कि बड़े नेताओं की अपने इलाके और लोगों में कितनी पकड़ है। जबसे राहुल गांधी ने कांग्रेस की कमान संभाली है, सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार रहे अहमद पटेल भी पहले की तरह फ्रंटफूट पर नहीं दिखाई देते। जिस प्रकार मध्यप्रदेश में दिग्वजिय सिंह को भोपाल से चुनावी मैदान में उतारा जा रहा है उसी प्रकार अहमद पटेल को भरूच से लड़ाकर उनकी नेतृत्व क्षमता की कसौटी होगी। जिस प्रकार भोपाल भाजपा का गढ़ है, उसी प्रकार भरूच भी अब भाजपा की सुरक्षित सीटों में से एक मानी जाने लगी है। ऐसे में दोनों ही नेताओं को जीतने के लिये काफी मेहनत करनी पड़ेगी। भरूच में दिक्कत यह भी नजर आ रही है कि भारतीय ट्रायबल पार्टी, कांग्रेस को समर्थन करती नहीं दिखती। यदि ऐसा होता है तो अहमद पटेल के लिये रास्ता और मुश्किल हो जायेगा।

वर्ष १९९१ में लोकसभा चुनाव हारने के बाद लगातार राज्यसभा सांसद के रूप में संसद और केंद्रीय राजनीति में अपना दबदबा कायम रखने वाले अहमद पटेल को लेकर ऐसी टिकाएं होती रहती थीं कि उन्होंने परोक्ष से गुजरात कोंग्रेस पर अपना एकाधिकार बनाये रखा है। उनकी मंजूरी के बगैर यहां कुछ नहीं होता। फिर भी स्थानीय चुनाव हों या लोकसभा-विधानसभा चुनाव, यहां कांग्रेस हमेशा से हारती आ रही है।

यदि इतिहास की बात करें तो वर्ष १९७७, १९८० और १९८५ में भरूच लोकसभा सीट अहमद पटेल जीतते आये हैं। १९८९ में राम मंदिर आंदोलन के बाद वे २१ हजार मतों से हारे। उसके बाद वे १९९१ में भी हारे और राज्यसभा के रास्ते ससंद में पहुंचे। उनकी हमेशा से आलोचना होती रही कि वे अपने घर भरूच में जीत नहीं सकते, गुजरात क्या जीतायेंगे। इसी विभावना को तोड़ने के लिये कहा जा रहा है कि अहमद पटेल को भरूच से इस बार का चुनाव लड़ाने का तख्‍ता तैयार किया जा रहा है।

ऐसे में कहा जा सकता है कि यदि अहमद पटेल चुनाव लड़ते हैं तो उनके लिये यह भारी चुनौती होगी। उनका मुकाबला पांच बार के विजेता भाजपा के मनसुख वसावा से होगा। यदि वे जीत गये तो और शक्तिशाली नेता के रूप में उभरेंगे और यदि हार गये तो युवाओं के लिये मार्ग प्रशस्त करना पड़ेगा। वैसे यदि वे स्वयं मुकाबले में आते हैं तो इसका प्रभाव गुजरात की अन्य सीटों पर भी पड़ सकता है। ऐसे में कहा जा सकता है कि कांग्रेस अपनी पूरी ताकत झोंक कर तुरुप चाल चलने का जोखिम उठाती दिख रही है।