क्या ऐसा होता है दुनिया में नंबर वन विकसित हो रहा शहर; दमकल दस्ते के पास न नेट (जाल), न ही ऊंची सीढ़ी


दो दिन पहले दुनिया दुनिया में सबसे तेज गति से विकास कर रहे सूरत शहर की एक परदेसी कंपनी की रिपोर्ट पर इठलाने वाले और सोशल मीडिया पर खुद की पीठ थपथाने वाले सूरत प्रशासन की सारी पोल शुक्रवार को शहर के सरथाना इलाके में हुए अग्निकांड ने खोल कर रख दी है। सूरत को स्मार्ट सीटी बनाने के सपने दिखाने वाले सत्ताधीश फ्लाई ओवर की कतारें, आलीशान रेलवे स्टेशन का मॉडल, मेट्रो ट्रेन, बुलैट ट्रेन का हीरे के आकार का स्टेशन आदि भारी-भरकम प्रोजेक्ट्स बना लेंगे, लेकिन शहर को जो मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिये उसमें सरासर कोताही बरत रहे हैं।

सूरत अग्निकांड में अब तक 23 लोगों की जान जा चुकी है। आज 23 परिवारों के चुल्हे बंद रहे. ये परिवार वह हैं जिनके बच्चे कल तक्षशिला आर्केड बिल्डिंग में लगी आग में खतम हो गये. इन परिवारो पर क्या बीती यह तो वो ही जानें लेकिन आग कि इस घटना के चलते पुरी दुनिया जान चूकि की फायर ब्रिग्रेड का काम और अग्निशमन उपकरण कैसे होते है. क्योकिं उंची बिंल्डिग में आग लगी है यह मेसेज मिलने के बाद भी फायर ब्रिग्रेड प्रशासन अपने साथ नेट(जाल) ले जाना भूल गये. इतना ही नहीं कहा तो यह भी जा रहा है कि उनके पास पांचवी मंझिल तक पहुंच सके इतनी उंची आपात सिडी भी नहीं थी. इस दर्जनाक हादसे को सूरत को कभी भूलना नहीं चाहिए।

चश्मदीदों और वीडियो के मुताबिक, इस हादसे के तुरंत बाद बुलाई गई फायर ब्रिगेड की टीम भी बच्चों को बचा नहीं पाई. पहले तो वह आग लगने के लगभग आधे घंटे बाद मौका-ए-वारदात पर पहुंची। चश्मदीदों का कहना है कि फायर ब्रिगेड के पास ना तो नेट (जाल) था. और उनकी सीढ़ियां इतनी छोटी थी कि वह चौथी मंजिल तक भी नहीं पहुंच सकी. कई बच्चों ने सीढ़ियां पकड़ने की कोशिश की, लेकिन इस कोशिश में वह ऊपर से नीचे आ गिरे. इस हादसे के बाद बदइंतजामी को देखते हुए सूरत महानगर पालिका, उसके दमकल विभाग और गुजरात सरकार पर भी कई सवाल खड़े हो गए हैं.

कोचिंग सेंटर में लकड़ी और थर्मोकोल काम काम ज्यादा था

इस भयानक अग्निकांड में कोचिंग की आर्ट टीचर दर्शिता बाल बाल बच गईं. हादसे से पहले दर्शिता अस्पताल चली गईं थी, जिसके चलते उन्हें कोचिंग सेंटर पहुंचने में देर हो गई. दर्शिता की माने तो इस बिल्डिंग और कोचिंग सेंटर में लकड़ी का काम ज्यादा था. कोचिंग सेंटर की सीलिंग में थर्मोकोल का इस्तेमाल किया गया था, जिसकी वजह से आग तेजी से फैल गई.

इस अग्निकांड ने कई परिवारों को ऐसा दर्द दिया है, जिसे ताउम्र नहीं भुलाया जा सकता. इस हादसे ने एक पिता के सपने को चूर चूर कर दिया. बेटी की शादी के सपनों को संजोए इस पिता के ख्वाब भी सूरत के इस तक्षशिला कॉम्पलेक्स में झूलस गए.

कृष्णा भेखड़िया बतौर ट्रेनी डिजाइनर यहां काम करती थी, लेकिन कल की दर्दनाक घटना ने इस शाम को उसकी जिंदगी का आखिरी पल बना दिया. कृष्णा के पिता ने बताया कि आग लगने के दौरान मेरी बेटी कृष्णा अपनी जान बचाने कॉम्पलेक्स से कूदी, जिससे उसका सर फट गया और उसे ब्रेन हेमरेज हो गया. हम उसे अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो गई थी.

इस हादसे के बाद सवाल उठ रहा है कि 23 मौतों का जिम्मेदार कौन है? सरकार ने जांच बिठा दी है. सीएम रुपाणी ने 4-4 लाख मुआवजे का एलान कर दिया है. लेकिन जो जख्म मरने वालों के परिवार को मिले हैं, उनकी भरपाई कभी नहीं हो पाएगी. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस हादसे पर दुख जताया है.

क्या एक स्मार्ट सिटी ऐसा होता है? करोडों रूपये फायर सेफ्टी के नाम सूरत महापालिका को चुकाने वाले सूरत वासियों को प्रशासनिक लापरवाहियों के खिलाफ एक सुर में विरोध करके अपने हक की सुविधाएं प्राप्त करनी ही होंगी।