2 साल की कानूनी कार्यवाही के बाद मिला IRCTC से 33 रुपये का रिफंड


(Photo Credit : facebook.com/sujit.swami)

आईआरसीटीसी के साथ दो साल की लंबी कानूनी लड़ाई के बाद कोटा के इंजीनियर सुजीत स्वामी को 33 रुपये का रिफंड मिला। रेलवे ने वर्ष 2017 में टिकट करने पर सेवा शुल्क के नाम पर 35 रुपये काट लिया। हालांकि, अभी भी मिलने वाले रुपये 2 रुपये कम हैं। अब शेष 2 रुपये के लिए भी यह जंग जारी रखने वाला है। स्वामी ने कहा कि उन्होंने कोटा से दिल्ली की स्वर्ण मंदिर मेल में 2 जुलाई की 765 रुपये की टिकट बुक कराई थी। वेटिंग की वजह से उनका टिकट रद्द कर दिया गया था। उसके बाद रेलवे ने इसे 665 रुपये लौटा दिया, लेकिन इसे 700 रुपये वापस मिलने चाहिए थे।

सुजीत स्वामी ने रेलवे के खिलाफ 35 रुपये वापस करने के लिए शिकायत की और दो साल से कानूनी प्रक्रिया चल रही थी। स्वामी ने कहा कि IRCTC ने उसे जो राशि वापिस की उसमें से उन्होंने सेवा कर के नाम पर 35 रुपये की कटौती की थी, जब उन्होंने GST लागू होने से पहले अपने टिकट को रद्द कर दिया था, इसलिए सेवा कर नहीं लगाया जाना चाहिए था।

सुजीत ने 8 अप्रैल, 2018 को लोक अदालत में एक याचिका दायर की। जनवरी 2019 में, अदालत ने मामले को यह कहते हुए बंद कर दिया कि यह उसके अधिकार क्षेत्र से बाहर है। इस सब के बीच, दिसंबर 2018 में उनके द्वारा किया गया आरटीआई अप्रैल तक लगभग 10 विभागों में घूम रहा था, जिसमें उन्होंने आईआरसीटीसी द्वारा काटे गए 35 रुपये की जानकारी मांगी।

लंबे समय के बाद आरटीआई के जवाब में, आईआरसीटीसी ने कहा कि रेलवे मंत्रालय के वाणिज्यिक परिपत्र संख्या 43 के अनुसार जीएसटी लागू होने से पहले बुक किए गए टिकटों को रद्द करने के बाद सेवा कर नहीं लिया जाएगा। इसलिए 1 मई 2019 को, रेलवे ने स्वामी के खाते में 33 रुपये जमा किए।