पानी से चलने वाला इंजन बनाने में भारत में किसी ने भाव नहीं दिया तो ये बंदा जापान चला गया!


(PC : Twitter/ANI)

भारत में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। लेकिन दिक्कत है कि प्रशासन प्रतिभावान लोगों को उचित अवसर एवं आवश्यक मदद नहीं करता। तमिलनाडु के कोयम्बटूर निवासी संथीराजन कुमारस्वामी के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ।

बात कुछ ऐसी है कि मिकेनिकल इंजीनियर संथीराजन के दावे के अनुसार उन्होंने डिस्टील्ड वॉटर से चलने वाला एक इंजन इजाद किया है। संथीराजन ने मीडिया को बताया कि उन्हें इस काम में जीवन के दस वर्ष लगा दिये। दुनिया में यह अपने तरीके का पहला उपकरण है। वे बताते हैं कि उनके इस इंजन में डिस्टील्ड वॉटर का उपयोग होता है, जिसमें नीहित हाईड्रोजन का उपयोग इंजन फ्यूल सोर्स के रूप में करता है और ऑक्सीजन हवा में छोड़ता है।

 

बता दें कि अब तक प्रचलित इंजन एक या दूसरे प्रकार के ऑईल का उपयोग फ्यूल के रूप में करते हैं और हवा में जहरीली कार्बन का उत्सर्जन करते हैं। ऐसे में कहा जा सकता है कि यदि संथीराजन की मेहनत वाकई रंग लाती है तो एक इकोफ्रेन्डली इंजन बाजार में आ सकता है।

लेकिन इस पूरे मामले का सबसे दुःखद पहलू यह है कि संथीराजन का सपना इस इंजन को भारत में लौंच करने का था। उन्होंने प्रशासन के हर दरवाजे पर दस्तक दी लेकिन कहीं से भी सकारात्मक प्रतिभाव नहीं मिला। आखिरकार थक हार कर संथीराजन ने जापान सरकार का संपर्क किया और जापान सरकार ने संथीराजन को हर संभव सहयोग दिया। संथीराजन के अनुसार अब आने वाले दिनों में डिस्टील्ड वॉटर से चलने वाला यह इंजन जापान में लॉंच होगा।