बच्चे गुम होने के मामले में गुजरात पहले क्रम पर


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गुजरात में, कानून और व्यवस्था ध्वस्त हो गई है क्योंकि गुजरात के अधिकांश शहरों में अपराध दिन-प्रतिदिन बढ़ता जा रहा है। महत्वपूर्ण बात यह है कि, गुजरात में शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के बावजूद, बूटलेगर्स से करोड़ों रुपये की शराब पकड़ी जाती हैं और जब पुलिस बूटलेगरों पर रेड करने जाती है, तो बूटलेगर पुलिस पर भी बेखौफ हमला करते हैं।

अन्य अपराधों की बात करें तो गुजरात लापता बच्चों की सूची में सबसे ऊपर है। 2 जून, 2015 से 21 दिसंबर, 2018 तक उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, गुजरात से हर महीने 882 बच्चे गुम हो जाते हैं। आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साढ़े तीन साल में गुजरात में 37,063 बच्चे खो गए हैं और दुख की बात है कि उनमें से ज्यादातर कभी वापिस नहीं मिल पाए।

गुजरात के बाद लापता बच्चों की संख्या में दूसरे क्रम पर मध्य प्रदेश आता है। लोकसभा के मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, पिछले साढ़े तीन साल के समय के दौरान, देश भर में 1.61 लाख बच्चे गायब होनी की रिपोर्ट है। 1.61 लाख में से 37,063 हजार बच्चे अकेले गुजरात से और 32,925 मध्य प्रदेश से थे।