2019 चुनाव परिणाम का सबक : क्षेत्रीय दल प्रमुख राष्ट्रीय दलों से समान दूरी बनाकर रखेंगे तो जीतेंगे!


PC : indiatoday.in

लोकसभा चुनाव 2019 में भारतीय जनता पार्टी ने एक प्रकार से सभी विरोधी दलों को धो डाला है। भाजपा ने न सिर्फ अपने बूते सरकार बनाने जीतना बहुमत हासिल कर लिया है, बल्कि एनडीए को मिलाकर इतनी बढ़त हासिल कर ली है कि 2014 की तुलना में भी मजबूत ‌और स्थिर सरकार कायम कर सकेंगे।

लेकिन राष्ट्रीय राजनीति से विपरीत 2019 के चुनाव से एक और बात उभर कर सामने आ रही है और वह है क्षेत्रीय दलों के लिये मतदाताओं का संदेश। बता दें कि इस बार लोकसभा चुनाव के साथ-साथ चार राज्यों में विधानसभा के चुनाव भी हुए। ये राज्य हैं आंध्रप्रदेश, उड़िसा, सिक्कित और अरुणाचल प्रदेश। इन चार राज्यों में अरुणाचल प्रदेश ऐसा राज्य है जहां मुख्य मुकाबला दो राष्ट्रीय पार्टियों भाजपा और कांग्रेस के बीच था और इसमें भाजपा मैदान मारती नजर आ रही है।

लेकिन इसके विपरीत अन्य तीन राज्य ऐसे हैं जहां क्षेत्रीय दल स्थानीय राजनीति पर हावी हैं और मुख्य राष्ट्रीय दल भाजपा और कांग्रेस का यहां उतना आधार नहीं है। ऐसे तीन राज्यों के परिणामों पर गौर करें तो साफ प्रतीत होता है कि मतदाता ऐसे क्षेत्रीय दल या नेता को पंसद करते हैं जो राष्ट्रीय दलों से समान दूरी बनाकर रखे। किसी एक दल या गठबंधन का हिस्सा न बने और राज्य के हित में मुद्दों के आधार पर काम करे।

उदाहरण के लिये आंध्रप्रदेश में तेलगूदेशम के चंद्राबाबू नायडू को करारी शिकस्त का सामना करना पडा है। यहां जगनमोहन रैड्डी ने धोबी पछ़ाड देते हुए 175 में से 151 सीटों पर विजयी बढ़त बना ली है। बता दें कि चंद्रबाबू नायडू राज्य में मुख्यमंत्री होने के उपरांत केंद्रीय स्तर पर किंग मेकर बनने के चक्कर में थे। उन्होंने चुनाव से कुछ महीने पूर्व ही एनडीए से अलग हटकर परोक्ष रूप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दो-दो हाथ कर लिये थे। लेकिन आंध्रप्रदेश की जनता ने अपना विकल्प तलाशा और जगनमोहन रैड्डी जो कि भाजपा और कांग्रेस दोनों से दूरी बनाकर चल रहे थे, को मुख्यमंत्री पद के लिये आवश्यक सीटें दे दी।

दूसरी ओर उड़िसा पर नजर डालें तो नवीन पटनायक लगातार मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज हैं और इस बार भी 108 सीटें जीतकर पुनः सत्ता कायम रखी है। उड़िसा में भाजपा 26 और कांग्रेस 10 सीटों के साथ क्रमशः दूसरे और तीसरे क्रम पर रही। बता दें कि इन चुनाव से पूर्व उड़िसा में फानी चक्रवात भी आया था और यहां इस संकट के समय में राज्य सरकार द्वारा उठाये गये एहतियाती कदम को दुनिया भर में सराहा गया था। शायद इसी का फल मुख्यमंत्री नवीन पटनायक को मिला है। उनके समक्ष कई बार केंद्र में भाजपा के गठजो़ड़ एनडीए से जुड़ने के अवसर आये लेकिन वे अपने ऊपर संयम बनाये रखे और आज पांच साल के लिये कुर्सी हासिल कर लिये हैं।

तीसरा राज्य है सिक्किम जहां एसडीएफ यह ‌लिखे जाने तक 32 सीटों में से 17 सीटों के प्राप्त रूझानों के अनुसार 10 सीटों के साथ बढ़त बनाये हुए है और उसका मुकाबला अन्य क्षेत्रीय दल एसकेएम से है जो 7 सीटों के साथ दूसरे क्रम पर है। कांग्रेस और भाजपा ने अभी खाता भी नहीं खोला है। यानि इन दोनों क्षेत्रीय दलों में से ही किसी की सरकार यहां बनेगी।