बिहार : भाजपा-जदयू में मनमुटाव एक-दूसरे को मंत्रीपद न देने से लेकर इफ्तार पार्टियों तक पहुंचा


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केंद्र में नई सरकार के गठन के बाद से ही बिहार की राजनीति गर्मा गई है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई में केंद्र में मंत्रिमंडल का गठन किया गया उसमें एनडीए के सभी घटक दलों को एक-एक मंत्रिपद देने का फार्म्यूला निकाला गया। लेकिन जनता दल युनाईटेड के नितीश कुमार को यह नियम नहीं भाया। उन्हें केंद्र में उनकी पार्टी से एक से अधिक मंत्री बनाये जाने की अपेक्षा थी। लेकिन जब उनकी बात नहीं मानी गई, तो उन्होंने मंत्रिपरिषद से बाहर रहना ही मुनासीब समझा। लेकिन नितीश कुमार के इस निर्णय से दोनों दलों के बीच मन-मुटाव के बीच पड़ गये हैं।

नाराज नीतिश के मंत्रिमंडल विस्तार में बीजेपी का कोई मंत्री नहीं

नितीश कुमार की नाराजगी का संकेत रविवार को उस समय दिखाई दिया जब नितीश ने अपने मंत्रिमंडल का विस्तार किया और उसमें भाजपा के खेमे से किसी को भी मंत्रि नहीं बनाया। यानि उनके तेवर यह थे कि केंद्र में भाजपा उनके सांसदों को मंत्रिपद से दूर रखेगी, तो राज्य सरकार में वे भाजपा के विधायकों को अतिरिक्त मंत्रिपद नहीं देंगे। लोकसभा चुनाव में कई विधायकों के सांसद बनने के बाद इस मंत्रिमंडल विस्तार में जेडीयू कोटे से 8 नए मंत्री बनाए गए हैं।

कांग्रेस से जेडीयू में आए पार्टी एमएलसी अशोक चौधरी के अलावा श्याम रजक, रामसेवक सिंह, नीरज कुमार, बीमा भारती, नरेंद्र यादव, संजय झा और लक्ष्मेश्वर राय ने मंत्री पथ की शपथ ली। जेडीयू के प्रदेश महासचिव लक्ष्मेश्वर राय ने मंत्री पथ की शपथ ली है। वहीं 2009 से लगातार जेडीयू के प्रवक्ता रहे नीरज कुमार को भी मंत्री बनाया गया है। बीजेपी से जेडीयू में आए संजय झा भी अब मंत्री बन गए हैं। वहीं कांग्रेस से जेडीयू में शामिल हुए अशोक चौधरी को भी मंत्री बनाया गया है।आलमनगर से विधायक नरेंद्र यादव को भी नीतीश ने अपने मंत्रिमंडल में शामिल किया है। वहीं 6 बार से विधायक श्याम रजक को भी मौका मिला है। इसी तरह आने वाले विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए नीतीश कुमार ने अति पिछड़ा समाज से बीमा भारती को कैबिनेट में शामिल किया है। इसके अलावा राष्ट्रीय सचिव रामसेवक सिंह भी इस बार मंत्रिमंडल का हिस्सा बन गए हैं।

इस मंत्रिपरिषद विस्तार में बीजेपी और एलजेपी से किसी विधायक को मंत्री नहीं बनाया गया है। हालांकि जेडीयू के महासचिव और मुख्‍य प्रवक्‍ता केसी त्‍यागी ने कहा है कि उनकी पार्टी गठबंधन में ‘छोटा भाई, बड़ा भाई’ की सोच के खिलाफ है। उन्‍होंने कहा कि अगर बीजेपी केंद्र सरकार में जेडीयू के सदस्‍यों को शामिल करने पर ‘संतोषजनक ऑफर’ देती है तो उनकी पार्टी इस पर विचार करेगी।

लोकसभा चुनाव में नीतीश सरकार के जल संसाधन मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह को मुंगेर लोकसभा क्षेत्र से सफलता मिली है, जबकि आपदा और लघु सिंचाई मंत्री दिनेश चन्द्र यादव को मधेपुरा से और पशु एवं मत्स्य संसाधन मंत्री पशुपति कुमार पारस को हाजीपुर से जीत हासिल हुई है। इससे पहले ही सृजन घोटाले में नाम आने के कारण मंजू वर्मा को समाज कल्याण मंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा था। इसके बाद से नीतीश मंत्रिमंडल में कोई भी महिला सदस्य नहीं है।

मनमुटाव इफ्तार पार्टियों तक पहुंचा

ऐसा नहीं है कि दोनों दलों के बीच का मनमुटाव केवल मंत्री पदों तक ही सीमित है, बल्कि यह इफ्तार पार्टियों तक पहुंच चुका है। जदयू द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में भाजपा का एक भी नेता नहीं पहुंचा, तो दूसरी ओर भाजपा द्वारा आयोजित इफ्तार पार्टी में एक भी जदयू विधायक नहीं पहुंचा। वैसे पूर्व मुख्यमंत्री जीतनराम मांझी जदयू और राजद दोनों की इफ्तार पार्टी में मौजूद रहे। उप मुख्यमंत्री और भाजपा नेता सुशील कुमार मोदी ने कहा है कि इफ्तार पार्टी में नेताओं के नहीं पहुंचने को राजनीतिक नजरिये से नहीं देखना चाहिये।

अब लोजपा के रामविलास पासवान ने इफ्तार पार्टी रखी है और देखना होगा कि भाजपा और जदयू के सांसद और विधायक इसमें हाजिर होते हैं या नहीं।