23 जनवरी को सबसे अहम फैसला


नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक की जाएंगी
नई दिल्ली। २३ जनवरी २०१६ को भारत की राजनीतिक इतिहास का सबसे अहम पैâसला होगा। जी हां ये वो पैâसला होगा जो देश की सियासत में ऐतिहासिक भूचाल लाएगा। इसी दिन नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मौत से जुड़ी फाइलें सार्वजनिक की जाएंगी।
२३ जनवरी को नेताजी सुभाष चंद्र बोस का जन्मदिन मनाया जाता है। इन फाइलों के सामने आने के बाद जहां एक ओर १८ अगस्त १९४५ को नेताजी के गायब होने के रहस्य से पर्दा उठेगा तो दूसरी ओर देश में सियासी भूचाल भी आने की संभावना है।
२३ जनवरी १८९७ को उड़ीसा (तब उड़ीसा ब्रिटिश बंगाल प्रेसीडेंसी का हिस्सा था) में कटक के बंगाली परिवार में जन्मे नेताजी सुभाषचंद्र बोस से जुड़ी ६४ अति गोपनीय फाइलों को पाqश्चम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी द्वारा सार्वजनिक करने के बाद कहा जा रहा है कि नेताजी १९४५ के बाद भी जीवित थे।विमान हादसे में नेताजी के मरने की झूठी ़खबर पैâलाई गई? ऐसे में इस तरह की आशंका की गहन जांच कराकर देश को सच बताने की ़जरूरत है ताकि नेताजी की मौत की सात दशक पुरानी अनसुलझी गुत्थी सुलझ सके।
मौत पर लिखी गई ४ किताबें
सुभाषचंद्र बोस की मौत के रहस्य पर चार ़िकताबें ठबैक प्रâॉम डेड इनसाइड द सुभाष बोस मिस्ट्रीठ (२००५), ठसीआईए’ज आई ऑन साउथ एशियाठ (२००८), ठइंडिया’ज बिगेस्ट कवरअपठ(२०१२) और ठनो सेव्रेâटठ (२०१३) लिखने वाले और एनजीओं `मिशन नेताजी’ के संस्थापक पत्रकार-लेखक अनुज धर ने तीन साल पहले ही कह दिया था कि कांग्रेस और कांग्रेस का एक बंगाली नेता दोनों नहीं चाहते थे कि नेताजी के बारे में रहस्यों से परदा हटे। अनुज ने कड़ी मेहनत से लिखी ़िकताबों में ताइवान सरकार के हवाले से दावा किया है कि १५ अगस्त से पांच सितंबर १९४५ के दौरान कोई विमान हादसा नहीं हुआ था।