111 जलमार्ग विकसित करने का बिल पास


नई दिल्ली। देश के कम से कम १११ जलमार्गों को यात्रियों और वस्तुओं की आवाजाही के लिए विकसित किए जाने की तैयारी है। संसद ने इस आशय के विधेयक को मंजूरी दे दी है। राष्ट्रीय जलमार्ग बिल, २०१५ को लोकसभा ने पहले ही पिछले साल २१ दिसंबर को पारित कर दिया था। फिर ९ मार्च को थोड़े संशोधनों के बाद राज्यसभा ने भी इसे पास कर दिया। राज्यसभा में संशोधन का प्रस्ताव जहाजरानी राज्यमंत्री पोन राधाकृष्णन ने रखा जिसे मंजूरी मिल गई। इस विधेयक के जरिए वेंâद्रीय कानून को लागू करने में मदद मिलेगी जिसके जरिए देश के १०६ अतिरिक्त जलमार्गों को राष्ट्रीय जलमार्गों में शामिल किया जा सकेगा। यह मौजूदा पांच राष्ट्रीय जलमार्गों से इतर होंगे। हालांकि राज्य सरकारों को इस बात का भय है कि इससे उनके अधिकारों में व्यवधान होगा। सड़क परिवहन, राजमार्ग और जहाजरानी मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि राज्यसभा में कहा कि इस लंबित बिल से राज्यों का जल मार्ग से होने वाला कारोबार बढ़ेगा और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देगा। दरअसल भारत में जलमार्गों पर अब तक कोई विशेष कार्य नहीं किया गया है। इस माध्यम से केवल ३.५ फीसद कारोबार ही होता है। जबकि चीन में जल मार्ग से कारोबार का प्रतिशत ४७, यूरोप में ४०, कोरिया व जापान ४४ फीसद और बांग्लादेश में ३५ फीसद कारोबार होता है। लोकसभा में सईस, अहेरिया और पेरुवनन समेत कुछ जातियों को अनुसूचित जाति (एससी) में शामिल करने के लिए एक विधेयक पारित किया गया है। यह बिल छत्तीसगढ़, हरियाणा, केरल, ओडिशा और पाqश्चम बंगाल राज्यों में मौजूद इन जातियों के संबंध में है। संविधान के अनुसूचित जाति आर्डर, १९५० से संबद्ध संशोधन बिल को सामाजिक न्याय मंत्री थावर चंद गहलोत ने पेश किया।