स्मृति के बयान से क्षुब्ध 10 दलित प्राध्यापकों का इस्तीफा


० दलित छात्र खुदकुशी मामले में बने फोरम ने टिप्पणी को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
हैदराबाद। हैदराबाद यूनिर्विसटी के एससी/एसटी टीचर्स और अधिकारियों की फोरम ने एक प्रैस रिलीज जारी करके मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के उस बयान की िंनदा की है जिसमें उन्होने कहा था कि रोहित वेमुला के सुसाइड नोट में किसी अधिकारी या सांसद का नाम नहीं था। फोरम ने कहा कि ये दुर्भाग्यपूर्ण है कि माननीय मंत्री ये कहते हुए देश को गुमराह कर रही हैं कि होस्टल वॉर्डन के पास छात्रों को निकालने का अधिकार है। स्मृति ईरानी के बयान की िंनदा करते हुए हैदराबाद सेंट्रल यूनिर्विसटी के १० दलित प्रोपेâसर्स ने प्रशासनिक पदों से इस्तीफा दे दिया है। फोरम ने कहा मंत्री का ये कहना गलत है कि जिस कमेटी ने छात्रों को सस्पेंड करने का पैâसला किया उसमें एक दलित प्रोपेâसर भी शामिल थे। प्रैस रिलीज में कहा गया कि इस मामले को गलत तरफ मोड़कर ईरानी खुद को और बंडारू दत्तात्रेय को रोहित की मौत की जिम्मेदारी लेने से बचाने की कोशिश कर रही हैं।
प्रैस रिलीज में कहा गया कि माननीय मंत्री के मनगढ़ंत बयानों के जवाब में हम दलित पैâकल्टी और अधिकारी अपने पदों से इस्तीफा देंगे। हम रोहित वेमुला की मौत के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों के साथ हैं और अपने छात्रों के सस्पेंशन और उनके खिलाफ पुलिस में दर्ज सभी मामलों को वापस लेने की मांग करते हैं। पिछले साल अगस्त में रोहित सहित पांच दलित छात्रों को विद्यार्थी परिषद के कार्यकत्र्ताओं से झड़प के बाद निलंबित कर दिया गया था। यह सब दिल्ली विश्वविद्यालय में वृत्तचित्र ‘मुजफ्फरनगर बाकी है’ की स्क्रीिंनग पर परिषद कार्यकर्ताओं के हमले के बाद शुरू हुआ। दलित छात्रों ने इसके विरोध में वैâम्पस प्रदर्शन किया था। इसके बाद इन छात्रों को हॉस्टल से दिसंबर में निकाल दिया गया था।